गोपालगंज, 1सितम्बर (उषा मिश्रा) बिहार सरकार ने मातृ और शिशु स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। जननी बाल सुरक्षा योजना के अंतर्गत अब प्रसव के 48 घंटे के भीतर लाभार्थी महिलाओं को प्रोत्साहन राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से उनके बैंक खाते में भेजी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करना है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को ₹1,400 और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को ₹1,000 की प्रोत्साहन राशि दी जाती है, बशर्ते उन्होंने संस्थागत प्रसव कराया हो। पहले इस राशि के भुगतान में हफ्तों लग जाते थे, लेकिन अब DBT पोर्टल के जरिए राशि सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंच रही है। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है और भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी और त्वरित हो गई है।
योजना के प्रमुख उद्देश्य
मातृ मृत्यु दर में कमी लाना
शिशु मृत्यु दर पर नियंत्रण
संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करना
प्रसव के बाद मां और शिशु की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करना
लाभार्थियों को मिल रही त्वरित राहत
अब महिलाओं को प्रसव के बाद आर्थिक सहायता के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ रहा है। 48 घंटे के भीतर राशि मिलने से महिलाओं को नवजात की देखभाल, दवाइयों और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल रही है। इससे योजना के प्रति भरोसा भी बढ़ा है।
योजना का लाभ कैसे लें?
इस योजना का लाभ पाने के लिए गर्भवती महिलाओं को आशा कार्यकर्ता की सहायता से सरकारी अस्पताल में पंजीकरण कराना होता है। प्रसव के बाद आशा कार्यकर्ता द्वारा रिपोर्ट और सत्यापन के बाद राशि लाभार्थी के खाते में भेज दी जाती है।
सुरक्षित प्रसव के लिए बड़ा कदम
राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यक्रम पदाधिकारी ने बताया कि अब तक सैकड़ों महिलाओं को इस त्वरित भुगतान प्रणाली का लाभ मिल चुका है। उन्होंने कहा, “यह पहल ग्रामीण इलाकों में सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने में मददगार साबित हो रही है। महिलाओं का विश्वास सरकारी अस्पतालों पर बढ़ा है और संस्थागत प्रसव की संख्या में इजाफा हुआ है।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि “कोई भी महिला घर पर प्रसव के लिए मजबूर न हो। आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मियों के सहयोग से हम हर गर्भवती महिला को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित कर रहे हैं।”
बिहार सरकार की यह पहल न केवल मातृ और शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाने का एक बड़ा माध्यम भी बनती जा रही है।

