नई दिल्ली, 6 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) हाल ही में एच-1बी वीजा नियमों में सख्ती और ट्रेड डील को लेकर चल रहे टैरिफ वॉर के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी टिप्पणियों ने भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है। इसके बावजूद अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय को भरोसा है कि ये मतभेद जल्द ही सुलझ जाएंगे।

इस आशावाद की जड़ें भारत और अमेरिका के दशकों पुराने राजनयिक संबंधों में हैं, जो 1947 के बाद से भले ही कई मुद्दों पर भिन्न रहे, लेकिन सहयोग के रास्ते हमेशा खुले रहे हैं। वर्तमान में दोनों देश क्वाड (Quad) जैसे मंचों के ज़रिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए रणनीतिक साझेदार हैं।
रक्षा, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय समझौतों ने इस साझेदारी को मजबूती दी है। लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज, संचार सुरक्षा और औद्योगिक सुरक्षा जैसे समझौते इस सहयोग की मिसाल हैं।
प्रवासी भारतीय समुदाय, जिसकी संख्या अमेरिका में 50 लाख से अधिक है, वीजा सख्ती और टैरिफ से सीधे प्रभावित हो रहा है। फिर भी सिटी ग्रुप की एनालिस्ट दीपा कहती हैं, “भारत और अमेरिका के बीच ये मतभेद अस्थायी हैं, अंततः दोनों को एक साझा रास्ता निकालना होगा।”
अमेज़न में कार्यरत गौतम किशोर मानते हैं कि घरेलू और वैश्विक हालात ने कुछ बाधाएं जरूर खड़ी की हैं, लेकिन दोनों देशों की साझेदारी इतनी गहरी है कि हल जल्द निकलेगा।
एफआईआईडीएस (भारत और भारतीय प्रवासी अध्ययन फाउंडेशन) और अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच जैसे संगठन इस संबंध को और मज़बूती देने के लिए सक्रिय हैं। सितंबर 2025 में हुए शिखर सम्मेलन में ट्रंप और मोदी दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
हालांकि अमेरिका-पाकिस्तान नजदीकियां, नेपाल, बांग्लादेश और लेह जैसे घटनाक्रम भारत की विदेश नीति के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह दौर भी निकल जाएगा।
जॉन हॉपकिन्स और प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी की शोधकर्ताओं का भी मानना है कि मतभेदों के बावजूद भारत और अमेरिका की साझेदारी व्यापक हितों और साझा मूल्यों पर आधारित है, और यही इसे टिकाऊ बनाता है।

