नई दिल्ली, 30 सितम्बर (अशोक”अश्क”) भुखमरी, गरीबी और गहराते आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से राहत की गुहार लगाई है। IMF का मिशन इन दिनों पाकिस्तान में है और लगभग दो सप्ताह तक ठहरकर यह जांच करेगा कि क्या पाकिस्तान ने अपनी अर्थव्यवस्था में सुधार की दिशा में जरूरी कदम उठाए हैं। अगर IMF को संतोषजनक प्रगति दिखती है, तो पाकिस्तान को नया कर्ज मिलने की उम्मीद है।

पाकिस्तानी अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को IMF मिशन और पाकिस्तान के आर्थिक प्रतिनिधिमंडल के बीच औपचारिक बैठक हुई। बैठक में सात अरब डॉलर के विस्तारित वित्तपोषण सुविधा (EFF) और 1.1 अरब डॉलर की लचीली और स्थिर सुविधा (RSF) के कार्यान्वयन की समीक्षा की गई।
इस समीक्षा बैठक का नेतृत्व IMF की मिशन प्रमुख ईवा पेत्रोवा ने किया, जबकि पाकिस्तान की ओर से वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल मौजूद था। इस बैठक में स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के गवर्नर, वित्त सचिव और संघीय राजस्व बोर्ड (FBR) के चेयरमैन समेत अन्य आर्थिक अधिकारी भी शामिल हुए।
रिपोर्ट बताती है कि यह समीक्षा ऐसे समय हो रही है जब जून 2025 तक पाकिस्तान का आर्थिक प्रदर्शन मिश्रित रहा है। IMF की समीक्षा में मुख्य रूप से जून तक के निर्धारित लक्ष्यों को आधार बनाया गया है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने IMF मिशन से अनुरोध किया है कि वह बाढ़ से हुए व्यापक नुकसान को भी ध्यान में रखे। सूत्रों के मुताबिक, बाढ़ से पहले के आंकड़ों के आधार पर ही फिलहाल मूल्यांकन किया जाएगा, लेकिन भविष्य में बाढ़ के प्रभाव को लेकर कुछ रियायतें दी जा सकती हैं।
अगर इस दो हफ्ते की समीक्षा प्रक्रिया में पाकिस्तान का प्रदर्शन IMF को संतोषजनक लगता है, तो देश को अक्टूबर में लगभग एक अरब डॉलर की अगली किश्त प्राप्त हो सकती है। इससे पहले मई 2025 में भी IMF ने पाकिस्तान को एक अरब डॉलर की सहायता दी थी, लेकिन उसके बदले कई सख्त आर्थिक शर्तें रखी थीं।
इन शर्तों में कार्बन लेवी लागू करना, बिजली दरों में नियमित बढ़ोतरी, और पानी की कीमतों में सुधार जैसे नीतिगत बदलाव शामिल थे। IMF चाहता है कि पाकिस्तान अपनी राजकोषीय नीतियों में पारदर्शिता लाए और आर्थिक अनुशासन बनाए रखे।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के पास IMF के अलावा फिलहाल कोई ठोस विकल्प नहीं बचा है। विदेशी मुद्रा भंडार बेहद सीमित है, और आयातों पर निर्भरता ने हालात को और बिगाड़ दिया है। ऐसे में IMF की यह समीक्षा न केवल आर्थिक सहायता के लिए बल्कि पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय साख के लिए भी बेहद अहम मानी जा रही है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पाकिस्तान IMF की सख्त शर्तों के बीच संतुलन बनाकर कर्ज के द्वार खोल पाएगा या नहीं।

