समस्तीपुर, 28 नवम्बर (समस्तीपुर डेस्क) सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही खरमास की शुरुआत मानी जाती है। वर्ष 2025 में खरमास 16 दिसंबर से आरंभ होगा और 14 जनवरी 2026 को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ समाप्त हो जाएगा। इस एक माह की अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे सभी शुभ-मांगलिक कार्य पूरी तरह वर्जित रहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य जब धनु और मीन राशि में रहते हैं तो उनका तेज घट जाता है और देवगुरु बृहस्पति की शुभता भी कम हो जाती है। इसी कारण इस दौरान कोई नया शुभ कार्य आरंभ नहीं किया जाता।

खरमास को पूजा-पाठ, भक्ति और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ समय माना गया है। इस महीने भगवान सूर्य और भगवान विष्णु की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। धार्मिक ग्रंथों के पाठ, भजन-कीर्तन और पवित्र नदियों में स्नान का भी इस अवधि में विशेष महत्व बताया गया है।
इस महीने में शादी, सगाई, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय, नया वाहन या महंगी वस्तुएं खरीदने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। वहीं, प्रतिदिन पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन, दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता को अत्यंत शुभ माना गया है। सनातन परंपरा में खरमास आध्यात्मिक उत्थान का विशेष काल माना जाता है।

