नई दिली 29 अगस्त (अशोक “अश्क”) देश में उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज़ हो गई हैं। चुनाव में अब दो सप्ताह से भी कम का समय बचा है और एनडीए तथा इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार अपने-अपने पाले में अधिक से अधिक समर्थन जुटाने में जुटे हैं। हालांकि संसद के आंकड़ों पर नजर डालें तो दोनों ही उम्मीदवारों को अपने गृह राज्यों में समर्थन की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।

एनडीए की ओर से तमिलनाडु के सीपी राधाकृष्णन और इंडिया गठबंधन की ओर से आंध्र प्रदेश के बी. सुदर्शन रेड्डी मैदान में हैं। दिलचस्प बात यह है कि दोनों के ही गृह राज्य उनके लिए चुनौती बनते नज़र आ रहे हैं।
बी. सुदर्शन रेड्डी का गृह राज्य आंध्र प्रदेश है, जहां लोकसभा की 25 और राज्यसभा की 11 सीटें हैं। यहां की राजनीति में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी का दबदबा है, जिसने पहले ही एनडीए के उम्मीदवार राधाकृष्णन को समर्थन देने की घोषणा कर दी है। आंध्र प्रदेश में लोकसभा में एनडीए के 11 और वाईएसआरसीपी के 4 सांसद हैं, जबकि राज्यसभा में वाईएसआरसीपी के 7 और एनडीए के 4 सदस्य हैं। इस तरह, रेड्डी के पास अपने गृह राज्य से एक भी वोट मिलने की संभावना नहीं है, जो उनके लिए बड़ी राजनीतिक असहजता की स्थिति है।
वहीं सीपी राधाकृष्णन के गृह राज्य तमिलनाडु की स्थिति भी कुछ कम कठिन नहीं है। तमिलनाडु में लोकसभा की सभी 39 सीटों पर इंडिया गठबंधन का कब्जा है। राज्यसभा की 18 सीटों में से अन्नाद्रमुक के 4 और एक निर्दलीय को छोड़कर बाकी सांसद भी इंडिया गठबंधन से हैं। ऐसे में यहां से राधाकृष्णन को अधिकतम 5 सांसदों का ही समर्थन मिल सकता है।
हालांकि संसद के दोनों सदनों में एनडीए के पास बहुमत और बाहरी समर्थन को देखते हुए राधाकृष्णन की जीत तय मानी जा रही है। बावजूद इसके, दोनों उम्मीदवारों द्वारा एनडीए और इंडिया गठबंधन से बाहर के दलों का समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं।
यह चुनाव जहां एक ओर संसद की राजनीति को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह भी स्पष्ट करता है कि क्षेत्रीय समर्थन और राष्ट्रीय रणनीति के बीच कैसे तालमेल बैठाना राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बना हुआ है।

