नई दिल्ली, 31 अगस्त (अशोक “अश्क”) देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ इस्तीफे के बाद भी अब तक उपराष्ट्रपति के आधिकारिक आवास में ही रह रहे हैं। स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने 21 जुलाई को उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था। हालांकि, उन्हें अब तक नया सरकारी आवास आवंटित नहीं किया गया है, जिस कारण वे फिलहाल उसी सरकारी बंगले में रह रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही धनखड़ दक्षिण दिल्ली के छतरपुर एनक्लेव स्थित अपने निजी आवास में शिफ्ट हो सकते हैं। यह एक अंतरिम व्यवस्था होगी, जब तक कि उन्हें औपचारिक रूप से नया सरकारी आवास नहीं मिल जाता।
नियमों के तहत पूर्व राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को टाइप-8 श्रेणी का बंगला आवंटित किया जाता है, जिसका प्रबंधन आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स द्वारा किया जाता है। धनखड़ पिछले साल अप्रैल से चर्च रोड स्थित उपराष्ट्रपति आवास में रह रहे थे।
सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय के अधिकारियों ने धनखड़ से मुलाकात की थी, लेकिन नये आवास को लेकर चर्चा आगे नहीं बढ़ सकी। ऐसे में उन्होंने छतरपुर एनक्लेव स्थित निजी मकान को चुना है और इस बाबत मंत्रालय को औपचारिक अनुरोध भी भेजा जा चुका है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि जब अनुरोध आता है, तो उपलब्ध विकल्प दिखाए जाते हैं और चयन के बाद सीपीडब्ल्यूडी मरम्मत और अन्य जरूरी काम शुरू करता है। इस प्रक्रिया में आमतौर पर तीन महीने तक का वक्त लग सकता है।
उपराष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद धनखड़ ने राजस्थान विधानसभा सचिवालय में पूर्व विधायक पेंशन के लिए भी आवेदन किया है। वे 1993 से 1998 तक किशनगढ़ से विधायक रह चुके हैं। पहले उन्हें बतौर विधायक 35,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती थी, लेकिन अब 70 वर्ष से अधिक आयु होने के कारण उन्हें 20% अतिरिक्त वृद्धि के साथ करीब 42,000 रुपये प्रति माह पेंशन मिलेगी।
इसके साथ ही, पूर्व उपराष्ट्रपति के रूप में उन्हें लगभग 2 लाख रुपये मासिक पेंशन मिलेगी। साथ ही, धनखड़ 1989 से 1991 तक झुंझुनू से सांसद भी रह चुके हैं, जिसके चलते उन्हें 45,000 रुपये मासिक सांसद पेंशन का भी लाभ मिलेगा।
धनखड़ को अब तीनों भूमिकाओं पूर्व विधायक, पूर्व सांसद और पूर्व उपराष्ट्रपति के तहत मासिक पेंशन के साथ अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी। इस तरह वह देश के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं जिन्हें तीन अलग-अलग स्रोतों से पेंशन प्राप्त होगी।
अब देखना यह है कि उन्हें नया सरकारी आवास कब तक आवंटित किया जाता है और वे मौजूदा उपराष्ट्रपति आवास को कब तक खाली करते हैं, जबकि 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति पद का चुनाव भी होना है।

