ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ने बॉर्डर डिफेंस को बनाया और भी ताक़तवर, एआईओएस और कामिकेज ड्रोन से बढ़ी निगरानी क्षमता

नई दिल्ली (अशोक “अश्क”) पाकिस्तान की ओर से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान की गई ड्रोन हमलों की कोशिशें भले ही भारत की एयर डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दी हों, लेकिन भारतीय सेना ने इससे सीख लेते हुए नियंत्रण रेखा (LoC) और जम्मू-कश्मीर के अंदरूनी हिस्सों में अपनी सुरक्षा प्रणाली को कई गुना अधिक मज़बूत कर लिया है। बीते तीन महीनों में सेना ने सीमाओं पर अपनी निगरानी क्षमताओं में भारी इजाफा किया है और आधुनिक टेक्नोलॉजी के माध्यम से घुसपैठ रोकने के लिए बहुआयामी रणनीति तैयार की है।


एक रिपोर्ट के अनुसार, सेना ने एंटी-इंफिल्ट्रेशन ऑब्सटेकल्स सिस्टम (AIOS) को और बेहतर बनाया है। इसके तहत LoC पर फेंसिंग, अत्याधुनिक सेंसर, कैमरे, रडार और निगरानी प्रणाली को अपग्रेड किया गया है। इसके अतिरिक्त, ड्रोन तकनीक का प्रयोग कर सीमा पार और अंदरूनी इलाकों की भी सतत निगरानी की जा रही है।
सेना की निगरानी प्रणाली में बॉर्डर सर्विलांस सिस्टम (BOSS) की भूमिका भी अहम रही है। इसमें हाई-रिजोल्यूशन कैमरे, थर्मल इमेजिंग, नाइट विजन, लेजर आधारित फेंसिंग और कम रेंज के पोर्टेबल सर्विलांस डिवाइसेस का समावेश किया गया है, जिससे छोटी से छोटी घुसपैठ की कोशिश भी अब पकड़ में आ सकेगी।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने तुर्की से खरीदे गए हथियारबंद और सर्विलांस ड्रोन के झुंड भेजकर भारतीय सेनाओं को चुनौती देने की कोशिश की थी। लेकिन भारत के एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम और सतर्कता ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
इस घटना के बाद भारतीय सेना ने न केवल बॉर्डर डिफेंस को सशक्त किया है, बल्कि आकाश से भी दुश्मन की निगरानी के लिए कामिकेज ड्रोन (Loitering Munition) की तैनाती बढ़ाई है। ये ड्रोन्स हवा में घूमते हुए लक्ष्य को ट्रैक करते हैं और सही समय पर सटीक हमला करते हैं। इन्हें आत्मघाती ड्रोन भी कहा जाता है।
विशेष बात यह है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने पहली बार इन स्वदेशी कामिकेज ड्रोन्स का सीमा पार स्थित आतंकी ठिकानों को टारगेट करने के लिए इस्तेमाल किया था। ये ड्रोन्स बेंगलुरु स्थित एक निजी कंपनी ने इजरायली मिलिट्री टेक्नोलॉजी फर्म के साथ मिलकर बनाए हैं। इनका प्रयोग कर भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, अब सेना ने जम्मू-कश्मीर के अंदरूनी हिस्सों में भी टेम्पररी ऑपरेटिंग बेस स्थापित किए हैं, जहां से जवान 48 से 72 घंटे तक ऑपरेशंस को अंजाम दे सकते हैं। इसके तहत संवेदनशील इलाकों में तेजी से प्रतिक्रिया देने वाली यूनिट्स को तैनात किया जा रहा है। इसके अलावा, अंदरूनी सुरक्षा को लेकर सीआरपीएफ को जिम्मेदारी सौंपने पर भी विचार हो रहा है।
यह रणनीति स्पष्ट करती है कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह अपने सुरक्षा तंत्र को सक्रिय, अत्याधुनिक और पहले से कई कदम आगे रखने की दिशा में कार्य कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों से सीखते हुए सेना ने यह सुनिश्चित कर लिया है कि दुश्मन चाहे किसी भी मोर्चे पर हमला करने की कोशिश करे, उसे हर कदम पर मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।

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