नई दिल्ली, 6 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) मई 2025 में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को सैन्य स्तर पर भारी नुकसान उठाना पड़ा। एक विशेष रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 9-10 मई को भारत के हमलों में पाकिस्तान और कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में महत्वपूर्ण सैन्य ढांचे तबाह हुए। इसमें अमेरिका से मिले एफ-16 लड़ाकू विमान, स्वीडन निर्मित अवाक्स (SAAB 2000 AEW&C) विमान, लॉकहीड सी-130, कई रडार प्रणाली और कमांड सेंटर शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पाकिस्तानी वायुसेना के भोलारी एयरबेस पर एक बड़ा हमला किया, जहां हैंगर में खड़ा एक एफ-16 जेट पूरी तरह नष्ट हो गया। हमले में एक स्क्वाड्रन लीडर, एक प्रमुख तकनीशियन सहित पांच पाकिस्तानी वायुसेना कर्मियों की मौत हो गई। इसी एयरबेस पर स्थित एरीये अवाक्स विमान को भी गंभीर क्षति पहुंची, जिसे बाद में अमेरिकी इंजीनियरों की विशेष टीम ने मरम्मत किया।
भारत के सटीक मिसाइल हमलों से शाहबाज एयरबेस (जैकबाबाद) में दो एफ-16 विमान और नूर खान एयरबेस (रावलपिंडी) में एक एफ-16 और एक सी-130 विमान नष्ट हो गए। साथ ही सरगोधा, रहीम यार खान और मुशफ एयरबेस पर रनवे, हैंगर और संचार प्रणालियों को भी भारी नुकसान पहुंचा।
हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इन हमलों को लेकर आधिकारिक तौर पर किसी प्रकार के नुकसान से इनकार किया, लेकिन दस्तावेज़ों से यह साफ हो गया है कि अमेरिकी वायुसेना की मरम्मत टीमों को पाकिस्तान भेजा गया था। इन टीमों ने अल-उदीद एयरबेस (दोहा), अल धफरा (अबू धाबी) और बेथेस्डा (मैरीलैंड) से आकर पाकिस्तानी उपकरणों की मरम्मत की।
इस पूरी प्रक्रिया के लिए पाकिस्तान ने 400 से 470 मिलियन डॉलर की आपातकालीन रक्षा निधि मई के अंत में स्वीकृत की थी। वहीं, अमेरिका ने एफ-16 और सी-130 से जुड़ी संवेदनशील तकनीक की चोरी के डर से मरम्मत कार्य में चीन की किसी भी भागीदारी को खारिज कर दिया।
पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पूर्व सेंटकॉम प्रमुख जनरल माइकल कुरिल्ला से मुलाकात कर व्यक्तिगत तौर पर मदद की गुहार लगाई थी, जिसके बाद अमेरिका ने मरम्मत कार्य को हरी झंडी दी।
जून से सितंबर 2025 के बीच अमेरिकी सैन्य विमान C-17 और C-130 की कई बार नूर खान एयरबेस पर लैंडिंग दर्ज की गई, जो इस बात का प्रमाण है कि अमेरिकी हस्तक्षेप पाकिस्तान की धरती पर सक्रिय रहा। सूत्रों के अनुसार, दक्षिण पंजाब में बाढ़ के चलते रहीम यार खान एयरबेस अभी भी संचालन में नहीं है, जबकि अन्य एयरबेस और ढांचों की मरम्मत का काम लगभग पूरा कर लिया गया है।
यह ऑपरेशन पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों और उसके अमेरिका पर निर्भरता की पोल खोलता है।

