बक्सर, 18 नवम्बर (विक्रांत) महीन चावल अनुसंधान उपकेंद्र (एफआरआरएस), तिलौंधा द्वारा बिहार की जीआई-टैग प्राप्त सुगंधित कतरनी चावल के वैज्ञानिक उत्पादन और गुणवत्ता संवर्धन को बढ़ावा देने हेतु एक दिवसीय किसान प्रक्षेत्र दिवस सह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन उपकेंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. आर.डी. रंजन ने किया। उन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के अनुसंधान निदेशक डॉ. ए.के. सिंह का स्वागत करते हुए कतरनी चावल को बिहार की कृषि-आर्थिक पहचान का अहम स्तंभ बताया।

मुख्य अतिथि डॉ. ए.के. सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि कतरनी चावल की उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक नवाचार, गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन, फसल विविधीकरण और किसान-केंद्रित विस्तार सेवाएँ अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पारंपरिक फसलों को आधुनिक तकनीक और अनुसंधान-समर्थित पद्धतियों से जोड़कर ही वैश्विक बाजार में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई जा सकती है।

बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर के प्राचार्य ने किसानों को आधुनिक खेती पद्धतियाँ अपनाने का आग्रह करते हुए बताया कि कतरनी चावल की बाजार मांग बहुत अधिक है और वैज्ञानिक खेती अपनाने से किसान न केवल उत्पादन बढ़ा सकते हैं, बल्कि राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान भी बना सकते हैं।
कार्यक्रम में आसपास के गांवों से लगभग 100 किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस दौरान विशेषज्ञों ने बीज उत्पादन, रोग प्रबंधन, जल-संरक्षण आधारित तकनीक और उन्नत कृषि विधियों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।
कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने अपने संदेश में कहा कि “कतरनी चावल बिहार की सांस्कृतिक और कृषि विरासत का प्रतीक है। वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीक के प्रसार से ही इसकी उत्पादकता में वृद्धि कर किसानों की आय को वास्तविक रूप से बढ़ाया जा सकता है।”
कार्यक्रम का समापन डॉ. सुदेशना दास के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

