पटना (अशोक “अश्क”) नकदी के पहाड़ और जले हुए नोटों की सनसनीखेज कहानी ने बिहार की सियासत और नौकरशाही को हिला दिया है। लाखों रुपये के नोट जलाकर सुर्खियों में आए भ्रष्ट इंजीनियर विनोद कुमार राय की अब पूरी कुंडली आर्थिक अपराध इकाई खंगाल रही है। अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि आखिर एक सरकारी अभियंता के पास इतनी बड़ी रकम कहां से आई और उसका स्रोत क्या है।

ईओयू की टीम इंजीनियर के अब तक के सेवा स्थलों, बैंक खातों, पैन कार्ड और आय से अधिक संपत्ति से संबंधित हर पहलू की जांच कर रही है। इसके अलावा, उन लोगों की भी पहचान की जा रही है जो इस घोटाले में लाभार्थी हो सकते हैं या इंजीनियर के करीबी रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, ईओयू जल्द ही ग्रामीण कार्य विभाग से भी संपर्क कर सकती है। विभाग से विनोद राय के अधीक्षण अभियंता रहते हुए निर्वहन किए गए कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी जा सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन प्रोजेक्ट्स से उन्होंने कथित रूप से घूस और काली कमाई की।
ईओयू मुख्यालय में सोमवार को वरीय अधिकारियों की बैठक में इस मामले की विस्तृत समीक्षा की गई। जांच के लिए गठित दो टीमें अभी भी सीतामढ़ी और समस्तीपुर में डटी हुई हैं, जहां इंजीनियर का कार्यस्थल और पैतृक निवास है। इन जगहों पर उनसे जुड़े लोगों और लेनदेन की गहराई से छानबीन की जा रही है।
फिलहाल विनोद कुमार राय न्यायिक हिरासत में जेल में हैं। ईओयू ने राय से पांच दिन की रिमांड की मांग की है, जिस पर मंगलवार को सुनवाई होनी है।
इस मामले में अब इंजीनियर की पत्नी बबली राय भी जांच के घेरे में आ गई हैं। हाल ही में अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद, अब ईओयू उन्हें भी जल्द हिरासत में लेकर पूछताछ कर सकती है। बबली राय पर नोट जलाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप हैं।
गौरतलब है कि ईओयू की छापेमारी से पहले, विनोद राय के आवास पर रातभर नोट जलाए गए थे। जब टीम वहां पहुंची तो टॉयलेट और पाइपलाइन में अधजले नोट भरे पड़े थे। छापे के दौरान 52 लाख रुपये की नकदी, 26 लाख रुपये के आभूषण और कई चल-अचल संपत्तियों के दस्तावेज भी बरामद हुए थे।
अब यह देखना अहम होगा कि ईओयू की जांच में और कौन-कौन नए चेहरे बेनकाब होते हैं और यह काली कमाई कहां से और कैसे जमा की गई। मामला जितना गंभीर है, उतना ही राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय भी बना हुआ है।

