नई दिल्ली, 28 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने सोमवार को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करते हुए उसके टर्म ऑफ रेफरेंस (ToR) को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज न्यायमूर्ति रंजन प्रकाश देसाई को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस वार्ता में बताया कि आयोग को अपनी रिपोर्ट 18 महीनों के भीतर प्रस्तुत करनी होगी। सरकार का लक्ष्य है कि आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू की जाएं।
टर्म ऑफ रेफरेंस के तहत आयोग के कामकाज का दायरा और दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। यानी आयोग किन मुद्दों पर विचार करेगा, कितने समय में अपनी रिपोर्ट देगा और किन बिंदुओं को प्राथमिकता में रखेगा।
8वां वेतन आयोग अपनी सिफारिशें तैयार करते समय निम्न पांच प्रमुख पहलुओं पर विशेष ध्यान देगा—
- देश की आर्थिक स्थिति और वित्तीय अनुशासन की आवश्यकता।
- विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधन सुनिश्चित करना।
- गैर-योगदान आधारित पेंशन योजनाओं की लागत का मूल्यांकन।
- राज्य सरकारों पर वित्तीय प्रभाव, क्योंकि वे भी आमतौर पर केंद्र की सिफारिशें अपनाती हैं।
- केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन, भत्तों और कार्य परिस्थितियों की तुलना।
केंद्रीय वेतन आयोगों का गठन समय-समय पर किया जाता है ताकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और सेवा शर्तों की समीक्षा की जा सके। आमतौर पर हर 10 साल में नया वेतन आयोग गठित होता है।
इसी क्रम में, केंद्र ने जनवरी 2025 में 8वें वेतन आयोग की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनधारकों के वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं की समीक्षा करना है।
सरकार को उम्मीद है कि इस आयोग की सिफारिशें लागू होने से कर्मचारियों के मनोबल में वृद्धि होगी और देश की आर्थिक उत्पादकता पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

