समस्तीपुर (अशोक “अश्क”) गुरुवार शाम समस्तीपुर व्यवहार न्यायालय परिसर उस समय अफरा-तफरी का केंद्र बन गया, जब एक कैदी पुलिस अभिरक्षा से हथकड़ी खोलकर फरार हो गया। हालांकि, कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने उसे पकड़ लिया, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर बिहार में पुलिस सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।

फरार हुआ आरोपी मुजफ्फरपुर जिले के सरैया थाना क्षेत्र के अहिलवारा गांव का रहने वाला अभिषेक कुमार है। बुधवार रात चकमेहसी थाना पुलिस और डीआईयू की संयुक्त कार्रवाई में उसे तारा चौक के पास घेराबंदी कर गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के समय उसने पुलिस पर फायरिंग भी की थी। तलाशी में पुलिस को उसके पास से पिस्तौल और कारतूस मिले थे। गुरुवार को उसे पेशी के लिए समस्तीपुर न्यायालय लाया गया था, लेकिन तभी वह पुलिस को चकमा देकर हथकड़ी खोलकर फरार हो गया।
कैदी के फरार होने की सूचना मिलते ही न्यायालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। पुलिसकर्मी हैरान रह गए कि हथकड़ी के बावजूद आरोपी कैसे भाग निकला। तत्परता दिखाते हुए पुलिस ने तुरंत पीछा शुरू किया और कुछ किलोमीटर दूर रेलवे कॉलोनी के पास जदयू जिला कार्यालय के समीप उसे धर दबोचा।
यह घटना उस समय और गंभीर हो जाती है, जब देखा जाए कि पिछले कुछ महीनों में बिहार के कई जिलों में इस तरह की घटनाएं बढ़ी हैं। मुजफ्फरपुर कोर्ट परिसर से कई बार अपराधी पुलिस को चकमा देकर फरार हो चुके हैं। हाल ही में वैशाली में एक फरार अपराधी का एसटीएफ और पुलिस ने एनकाउंटर किया था, लेकिन अन्य कई अब भी फरार चल रहे हैं।
ऐसे में बार-बार कोर्ट परिसर या थाना परिसर से कैदियों का फरार होना न केवल सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करता है, बल्कि पुलिस की कार्यशैली और सतर्कता पर भी सवाल उठाता है। एक ओर जहां पुलिस तमाम संसाधनों और मेहनत से अपराधियों को पकड़ती है, वहीं इस तरह उनकी गिरफ्त से अपराधियों का आसानी से निकल जाना चिंता का विषय है।
समस्तीपुर की इस घटना ने एक बार फिर बिहार पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि आखिर बार-बार एक ही तरह की लापरवाही क्यों हो रही है? पुलिस मुख्यालय ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। उम्मीद की जा रही है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुख्ता कदम उठाए जाएंगे।

