
पटना, 30 जनवरी, (पटना डेस्क) गन्ना की खेती को बढ़ावा देने और जल-जमाव की गंभीर समस्या से निजात दिलाने के उद्देश्य से जल संसाधन विभाग ने कमर कस ली है। इसी क्रम में आज विभागीय सभाकक्ष में एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की प्रगति की गहन समीक्षा की गई।

बैठक की अध्यक्षता जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव श्री संतोष कुमार मल्ल ने की।बैठक में गन्ना उद्योग विभाग के ईखायुक्त श्री अनिल कुमार झा, गन्ना मिलों के प्रतिनिधि, विभागीय अभियंता प्रमुख, विभिन्न जिलों के मुख्य अभियंता तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े क्षेत्रीय अभियंता उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि गन्ना कृषि क्षेत्रों से जुड़ी नहरों, स्लूईस गेट, पुलिया निर्माण, नाला उड़ाही और अतिक्रमण मुक्ति को लेकर जिलावार सर्वेक्षण कार्य प्रगति पर है।

प्रधान सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी जिले शीघ्र सर्वेक्षण पूरा कर प्रतिवेदन उपलब्ध कराएं, ताकि प्राथमिकता के आधार पर योजनाओं को अंतिम रूप देकर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि जल निकासी से जुड़े कार्यों को मनरेगा की वार्षिक कार्य योजना में शामिल कराने की प्रक्रिया जारी है और इसके लिए 15 दिनों का अतिरिक्त समय मांगा गया है।पश्चिम चंपारण के 11 प्रखंडों में 41 योजनाओं से 31,361 एकड़, पूर्वी चंपारण के 12 प्रखंडों में 28 योजनाओं से 13,729 एकड़ तथा समस्तीपुर में 16,500 एकड़ क्षेत्र को जल-जमाव से राहत मिलने की संभावना है।

गोपालगंज, सिवान और बेगूसराय में भी योजनाएं चिन्हित की गई हैं।मसान नदी के दोनों तटबंधों का 46.056 किलोमीटर निर्माण भी जल-जमाव समाधान में मील का पत्थर साबित होगा। बैठक में निर्णय लिया गया कि 15 दिन बाद पुनः समीक्षा होगी। सरकार की यह पहल गन्ना किसानों के लिए राहत और उत्पादन वृद्धि की नई उम्मीद लेकर आई है।

