गोपालगंज, 2 अक्टूबर(निज संवाददाता) गुरुवार को कुचायकोट प्रखंड के नया टोला पीताम्बरा पीठ व ढेबवा गांव में ज्योतिर्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का ऐतिहासिक आगमन पर ग्रामीणों ने उत्साह और श्रद्धा के साथ उनका स्वागत किया। वर्ष 1944 के बाद पहली बार शंकराचार्य का आगमन हुआ, जिससे गांव का माहौल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रंग में रंग गया। शंकराचार्य ने गाय को भारतीय संस्कृति,आत्मा और पहचान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि एक साजिश के तहत देसी गाय की नस्लों को समाप्त किया जा रहा है और विदेशी तथा शंकर नस्ल की गायों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

यह स्थिति भारतीय संस्कृति और अस्तित्व के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति को सुरक्षित रखते हुए देसी गायों का संरक्षण और संवर्धन करना होगा। इसके लिए सभी लोगों को मिलकर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो हिंदू गौ की रक्षा नही कर सकता उसे हिंदू धर्म में होने का मतलब क्या है। हिंदू के बिना हिन्दू राष्ट्र का मतलब क्या है। उन्होंने गौरक्ष पीठाधीश्वर पर निशाना साधते हुए कहा कि जिसे गौ रक्षा की जिम्मेदारी वह तो सदन में अपने विधायक के गौ माता के कटने के प्रश्न पर जबाब नही दे पाते हैं और अपने अधिकारियों से कुर्ता फड़वाते है। वे वेद पुराण पर बोलते हुए कहे कि हम सभी वेद पुराण को मान रहे हैं। उन्होंने 1857 की आजादी की लड़ाई का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संघर्ष भी गाय माता की रक्षा से शुरू हुआ था। अंग्रेजों द्वारा राइफल की कारतूस में गाय की चर्बी के उपयोग का विरोध करते हुए देश के वीर सेनानियों ने विद्रोह का बिगुल फूंका था,जो आगे चलकर स्वतंत्रता संग्राम में परिवर्तित हो गया। 1947 में देश को आजादी मिली। उस समय नेताओं ने वादा किया था कि आजाद भारत में गोवध पर प्रतिबंध लगाया जाएगा,लेकिन आजादी के 78 वर्ष बाद भी देश गोवध से मुक्त नहीं हो पाया है। अब आवश्यकता है कि सरकार पर दबाव बनाकर इस दिशा में ठोस कदम उठाने की। शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि उनकी योजना प्रखंड स्तर पर ऐसे संवर्धन केंद्र विकसित करने की है, जहां देसी गायों के प्रजनन के लिए आधुनिक साधन उपलब्ध होंगे। इसके लिए उन्होंने ग्रामीणों से सक्रिय सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल भौतिक संसाधन जुटा लेने और आधारभूत संरचना तैयार कर लेने से कोई देश विश्वगुरु नहीं बन सकता। भौतिक विकास के साथ-साथ हमें अपनी संस्कृति,सभ्यता व मान्यताओं का भी संरक्षण और विकास करना होगा। भारत में कोई नेता गौ हत्यारों के साथ खड़ा नही हो सकता,नहीं तो उन्हें जनता की पीट कर मार डालेंगी। शंकराचार्य के उद्बोधन से पूर्व काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वेद विभाग के प्रोफेसर डॉ. उपेंद्र कुमार त्रिपाठी ने शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने 1946 के बाद पहली बार शंकराचार्य के आगमन को गांव के लिए ऐतिहासिक दिन बताया। इसके बाद वे नौका टोला कुचायकोट स्थित बगलामुखी मंदिर प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में भी शंकराचार्य का संबोधन हुआ
इस अवसर पर महर्षि शिवानंद अनिल शास्त्री,विपरेंदु शास्त्री ,उमेश तिवारी, नागेंद्र तिवारी, संजय राय, प्रभाकर सिंह, रुनझुन सिंह, संदीप सिंह,श्याम बिहारी पांडेय, संतोष पाठक, अखिलेश्वर सिंह, राजू मिश्रा, अनूप सिंह, सुमित सहित पंचायत प्रतिनिधि तथा सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।

