नई दिल्ली, 29 नवम्बर ( अशोक “अश्क”) रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चार साल बाद 4 और 5 दिसंबर को भारत का दौरा करेंगे। यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही है और पुतिन 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में भारत-रूस के द्विपक्षीय संबंध और भी मजबूत हुए हैं।

हालांकि, पुतिन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने मार्च 2023 में यूक्रेन में कथित युद्ध अपराधों के आरोप में गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। ICC का मुख्यालय हेग, निदरलैंड्स में स्थित है और यह वैश्विक अदालत जनसंहार, युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों के मामलों की जांच और मुकदमा चलाने की शक्ति रखती है। रूस और यूक्रेन दोनों ICC के सदस्य नहीं हैं और भारत ने भी इस अदालत के समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसलिए, वारंट का भारत पर कोई कानूनी असर नहीं है और नई दिल्ली पुतिन के खिलाफ कोई कार्रवाई करने के लिए बाध्य नहीं है।
ICC वारंट के बावजूद पुतिन के भारत आगमन को लेकर सुरक्षा और यात्रा मार्गों की तैयारी पूरी कर ली गई है। मॉस्को के शेरेमेत्येवो एयरपोर्ट से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट तक छह संभावित मार्गों पर विचार किया गया है: विया तेहरान, अजरबैजान के बाकु, काबुल, डायरेक्ट रूट, ताशकंद (उज्बेकिस्तान) और अल्माटी (कजाखस्तान)।
विशेषज्ञों का कहना है कि ICC वारंट के बावजूद किसी अन्य देश में पुतिन को हिरासत में लेने की संभावना बहुत कम है। भारत पहले भी ऐसे नेताओं की मेजबानी कर चुका है, जैसे 2015 में सूडान के तत्कालीन राष्ट्रपति ओमर हसन अल-बशीर, जिनके खिलाफ ICC कार्रवाई चल रही थी। इस दौरे के दौरान भारत-रूस संबंधों को और मजबूती मिलने की संभावना है।

