नई दिल्ली, 24 सितंबर (अशोक “अश्क”) अमेरिका द्वारा H-1B वीजा की फीस बढ़ाए जाने के बाद अब चीन का ‘K-Visa’ चर्चा में है। जहां H-1B वीजा अमेरिका में काम करने के लिए जारी किया जाता है, वहीं K-Visa चीन की नई नीति के तहत वैश्विक वैज्ञानिक और तकनीकी प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए शुरू किया गया है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी Xinhua के अनुसार, यह योजना 1 अक्टूबर 2025 से लागू होगी।

क्या है K-Visa?
K-Visa चीन में उच्च तकनीकी, रिसर्च और बिजनेस से जुड़े क्षेत्रों में काम करने के इच्छुक विदेशी युवाओं को दिया जाएगा। यह वीजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए है, जिन्होंने STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) विषयों में डिग्री हासिल की है, चाहे वह डिग्री चीन से ली गई हो या किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित संस्थान से।
इस वीजा के तहत मल्टीपल एंट्री की सुविधा होगी यानी आप कई बार चीन आ-जा सकते हैं।
लंबे समय तक वैध रहेगा, जिससे वीजा रिन्यू की झंझट कम होगी।
चीनी नियोक्ता का इनविटेशन लेटर जरूरी नहीं होगा।
रिसर्च, टीचिंग, पढ़ाई, संस्कृति, स्टार्टअप और बिजनेस से जुड़े कामों के लिए मान्य होगा।
क्या K-Visa H-1B की जगह ले सकता है?
नहीं। K-Visa और H-1B दोनों अलग-अलग देशों के लिए हैं और दोनों का उद्देश्य अलग है।
H-1B वीजा अमेरिका में काम करने वाले विदेशी पेशेवरों को दिया जाता है।
K-Visa चीन में काम, रिसर्च या पढ़ाई के लिए है।
इसलिए K-Visa, H-1B की जगह नहीं ले सकता। यह चीन की अपनी वैश्विक प्रतिभाओं को लुभाने की रणनीति का हिस्सा है।
पिछले कुछ वर्षों में चीन ने विदेशी नागरिकों के लिए अपने वीजा नियमों में कई बदलाव किए हैं:
अब 55 देशों के नागरिकों को 240 घंटे (10 दिन) तक चीन में वीजा-फ्री ट्रांजिट की सुविधा है।
चीन ने 75 देशों के साथ वीजा-फ्री समझौते किए हैं।
साल 2025 की पहली छमाही में चीन में 3.8 करोड़ विदेशी पहुंचे, जिनमें से 1.36 करोड़ वीजा-फ्री एंट्री से आए।
चीन के प्रमुख वीजा:
L Visa – टूरिस्ट
M Visa – बिजनेस
F Visa – एक्सचेंज/रिसर्च
X Visa (X1/X2) – स्टूडेंट
Z Visa – जॉब/वर्क
K Visa – नई प्रतिभाओं के लिए
S/Q Visa – परिवार के लिए
D Visa – स्थायी निवास
J Visa (J1/J2) – पत्रकार
R Visa – हाई-लेवल स्किल्स
G Visa – ट्रांजिट
K-Visa चीन का एक स्ट्रैटजिक कदम है, जिससे वह वैश्विक वैज्ञानिक, तकनीकी और बिजनेस प्रतिभाओं को आकर्षित करना चाहता है। यह वीजा खासकर उन युवाओं के लिए है जो चीन में काम, पढ़ाई या स्टार्टअप करना चाहते हैं। हालांकि इसका अमेरिका के H-1B वीजा से कोई सीधा मुकाबला नहीं है, लेकिन वैश्विक स्तर पर टैलेंट की होड़ में यह चीन की एक बड़ी कूटनीतिक चाल मानी जा रही है।

