जमुई (अशोक “अश्क”) समाजवाद की उर्वर मानी जाने वाली मिट्टी जमुई विधानसभा सीट पर 2020 में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का कमल खिला था। यह सीट एनडीए की ओर से पहली बार श्रेयसी सिंह के नाम रही, जो वर्तमान में विधायक हैं। इस सीट पर भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद यहां “नो वैकेंसी” का बोर्ड टंग चुका है। जिले की अन्य सीटों की तरह यहां भी एनडीए में बदलाव की गुंजाइश फिलहाल बेहद कम नजर आती है।

इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में श्रेयसी सिंह की सीट “शिफ्ट” होने की चर्चाएं हवा में तैर रही हैं। कुछ संभावित उम्मीदवार इस बहाने सुर्खियां बटोरने की कोशिश में जुटे हैं। लेकिन राजनीतिक समीक्षकों की मानें तो भाजपा इस सीट पर श्रेयसी का टिकट काटने का जोखिम शायद ही लेगी। पार्टी में श्रेयसी के अलावा जिन नामों की चर्चा है उनमें लक्ष्मीपुर के पूर्व अंचलाधिकारी निर्भय प्रताप सिंह, विकास सिंह और प्रकाश भगत शामिल हैं, लेकिन ये केवल चर्चाओं तक ही सीमित हैं।
दूसरी ओर महागठबंधन में यह सीट पारंपरिक रूप से राजद के खाते में रही है और इस बार भी इसके राजद को मिलने की संभावना प्रबल है। इस स्थिति को देखते हुए राजद में टिकट के कई दावेदार सक्रिय हो चुके हैं। अब तक यहां से पूर्व मंत्री विजय प्रकाश चुनाव लड़ते रहे हैं, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश नारायण यादव के अनुज हैं। लेकिन तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद की नई पीढ़ी की राजनीति के चलते विजय प्रकाश का टिकट कटने की चर्चा जोरों पर है।
सूत्रों की मानें तो यादव परिवार में झाझा सीट तय मानी जा रही है, जिससे जमुई सीट किसी अन्य को दी जा सकती है। इसी क्रम में पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह के पुत्र अजय प्रताप सिंह का नाम सबसे ऊपर माना जा रहा है। अजय प्रताप की गांव-गांव में पहचान, हर जाति और वर्ग में पकड़ उन्हें एक मजबूत प्रत्याशी बनाती है।
इधर कुशवाहा समाज से पप्पू मंडल की पत्नी सुजाता सिंह का नाम तेजी से उभरा है। सुजाता सिंह पिछला चुनाव निर्दलीय लड़ी थीं और करीब 20 हजार वोट हासिल किए थे। हालांकि पप्पू मंडल की कट्टर हिंदूवादी छवि उनके रास्ते में बाधा बन सकती है। साथ ही शमशाद आलम, रविंद्र मंडल और अन्य कई नाम भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं।
2020 में विजय प्रकाश को करीब 40 हजार वोटों से हार मिली थी, जिसमें शमशाद आलम द्वारा मिले 18 हजार वोट निर्णायक साबित हुए थे।
जनसुराज की ओर से भी अधिवक्ता रूपेश सिंह, जिला पार्षद अनिल साह, संजीव सिंह और कुशवाहा समाज के ज्योतिष कुमार जैसे चेहरे क्षेत्र में सक्रिय हैं और जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष त्रिपुरारी प्रसाद सिंह और पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह की इस राजनीतिक धरती से इंडी गठबंधन का टिकट किसे नसीब होता है और 2025 में जनता किस पर भरोसा जताती है।

