
गोपालगंज, 05 जनवरी (टीएन मिश्रा) तमिलनाडु के महाबलीपुरम से 2178 किमी की दूरी तय दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग मंजिल तक पहुंच कर अटक है। ईस्ट एंड वेस्ट कॉरिडोर को जोड़ने वाला लाइफ लाइन डुमरिया घाट गंडक नदी पर स्थित जर्जर पूल चुनौती बन गया है। पूर्वी चंपारण तक पहुंचाने में डुमरिया पुल की जर्जर स्थिति बड़ी चुनौती बनकर सामने आ गई है। करीब 210 मीट्रिक टन वजनी इस विराट शिवलिंग को सुरक्षित पार कराने के लिए जिला प्रशासन व मंदिर ट्रस्ट के बीच लगातार मंथन जारी है।बता दें कि एनएच-27 पर स्थित डुमरिया पुल लंबे समय से जर्जर अवस्था में है। भारी वाहनों के लगातार परिचालन से पुल की संरचनात्मक क्षमता कमजोर हो चुकी है।

ऐसे में सैकड़ों टन वजन वाले ट्रेलर के साथ शिवलिंग को इस पुल से ले जाना किसी बड़े खतरे से कम नहीं माना जा रहा है। इसी गंभीर समस्या के समाधान के लिए जिला प्रशासन ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा एनएचएआई के वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञों की टीम बुलाई है। विशेषज्ञ पुल के पाया,गर्डर व भार वहन क्षमता की गहन जांच करेंगे तथा यह चिन्हित किया जाएगा कि पुल के कौन-से हिस्से सबसे अधिक कमजोर हैं। यदि जांच में डुमरिया पुल को जोखिमपूर्ण पाया जाता है, तो शिवलिंग को वैकल्पिक लंबे मार्ग से ले जाने पर विचार किया जाएगा, हालांकि इतने भारी वाहन के लिए हर सड़क उपयुक्त नहीं है। इसके अलावा पुल के नीचे अतिरिक्त जैक या लोहे के गर्डर लगाकर अस्थायी रूप से मजबूत करने की योजना भी विकल्प के रूप में सामने है,ताकि ट्रेलर को बेहद धीमी गति से सुरक्षित पार कराया जा सके।

इस पूरे अभियान में जिले व पूर्वी चंपारण दोनों जिलों का प्रशासन आपसी समन्वय बनाए हुए है। जिलाधिकारी स्वयं इसकी निगरानी कर रहे हैं, ताकि विराट रामायण मंदिर के लिए निर्मित यह ऐतिहासिक शिवलिंग बिना किसी क्षति के अपने गंतव्य तक पहुंच सके। बता दें कि 33 फुट ऊंचा 33 फुट लंबा यह विशाल शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम से लगभग 2178 किलोमीटर की दूरी तय कर गोपालगंज पहुंचा है और फिलहाल यूपी–बिहार बलथरी चेकपोस्ट पर रोका गया है। इसे नारायणी नदी (गंडक) पार कर पूर्वी चंपारण ले जाना प्रस्तावित है।रविवार की शाम डीएम पवन कुमार सिन्हा व एसपी अवधेश दीक्षित पहुंचकर शिवलिंग का निरीक्षण किया। साथ ही डुमरियाघाट सेतु की तकनीकी स्थिति के आकलन के लिए पुल निगम और विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम को सक्रिय किया गया। यदि टीम सेतु से पार कराने की अनुमति नहीं देती है, तो नदी पार कराने की प्रक्रिया एक बड़ी चुनौती बन सकती है।डीएम पवन कुमार सिन्हा ने बताया कि इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ लगातार विचार-विमर्श किया जा रहा है। सुरक्षा, तकनीकी क्षमता और वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर गहन मंथन के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी तैयारी और आवश्यक अनुमति के बिना शिवलिंग को नारायणी नदी पार नहीं कराया जाएगा।वहीं एसपी अवधेश दीक्षित ने बताया कि शिवलिंग के दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। इसे देखते हुए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं तथा यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए विशेष योजना लागू की जा रही है, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।उल्लेखनीय है कि यह शिवलिंग पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर स्थित नवनिर्मित विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया जाना है। करीब 30 दिनों की लंबी यात्रा पूरी कर गोपालगंज पहुंचे इस ऐतिहासिक शिवलिंग के स्वागत में बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य लोग शामिल हुए हैं।

