नई दिल्ली, 16 नवम्बर (अशोक “अश्क”) भारत के रेलवे ढांचे में जल्द ही एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने वाला है। वर्षों से चर्चा में रही बुलेट ट्रेन अब जल्द ही हकीकत का रूप लेने के करीब है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR) पर कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और सरकार इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अत्याधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों से विकसित कर रही है।

करीब 508 किमी लंबे इस कॉरिडोर में से 465 किमी हिस्सा पुलों पर बनाया जा रहा है, जो पूरे प्रोजेक्ट का लगभग 85 प्रतिशत है। अब तक 326 किमी निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है, जबकि प्रस्तावित 25 नदी पुलों में से 17 का कार्य समाप्त हो चुका है। इससे संकेत मिलता है कि प्रोजेक्ट समय पर पूरा करने की दिशा में मजबूत प्रगति कर रहा है।
बिहार में प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सूरत बुलेट ट्रेन स्टेशन का निरीक्षण किया। पीएम मोदी के दौरे के बाद प्रोजेक्ट की रफ्तार और समीक्षा को लेकर अधिकारियों में नई ऊर्जा दिखाई दी है। यह स्टेशन दुनिया के आधुनिक रेलवे स्टेशनों की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है, जिसमें अत्याधुनिक सुविधाएं, यात्री सुरक्षा के उन्नत प्रबंध और बेहतर कनेक्टिविटी शामिल होंगी।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर भारत की अब तक की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में गिना जाता है। यह परियोजना देश में हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के नए युग की शुरुआत का प्रतीक मानी जा रही है। 508 किमी लंबे इस कॉरिडोर में 352 किमी हिस्सा गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरता है, जबकि 156 किमी का मार्ग महाराष्ट्र में पड़ता है।
यह कॉरिडोर साबरमती, अहमदाबाद, आणंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोइसर, विरार, ठाणे और मुंबई को जोड़ेगा। इसके शुरू होने के बाद यात्रा का समय काफी कम होगा और परिवहन प्रणाली में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। साथ ही यह प्रोजेक्ट भारत को हाई-स्पीड रेल तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करेगा।

