नई दिल्ली, 22 सितम्बर (अशोक “अश्क”) अमेरिका द्वारा शुरू किए गए टैरिफ वॉर के जवाब में भारत की ओर से दी गई शांत प्रतिक्रिया की वजह अब सामने आई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मोरक्को में इस मुद्दे पर खुलकर बात की और बताया कि भारत ने सोच-समझकर प्रतिक्रिया नहीं दी थी, क्योंकि देश का दृष्टिकोण व्यापक और परिपक्व था।

सिंह ने कहा, “हम प्रतिक्रिया नहीं देते… जिन लोगों की सोच बड़ी होती है और दिल बड़े होते हैं, वो किसी भी चीज पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं देते हैं।” उन्होंने यह बयान मोरक्को में बसे भारतीय समुदाय के सदस्यों से बातचीत के दौरान दिया। गौरतलब है कि किसी भारतीय रक्षा मंत्री की यह पहली मोरक्को यात्रा है।
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाए थे। इसके अलावा, भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने पर भी अमेरिका ने दबाव और जुर्माने की धमकी दी थी। बावजूद इसके, भारत ने संयमित और रणनीतिक चुप्पी बनाए रखी।
रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि यह यात्रा अफ्रीका में भारत के पहले रक्षा विनिर्माण संयंत्र की स्थापना के तहत की जा रही है। यह संयंत्र ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की दिशा में भारत की वैश्विक रक्षा उपस्थिति को मजबूत करेगा। इस दौरान सिंह मोरक्को के रक्षा मंत्री अब्देलतीफ लौदियी के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे।
इस मुद्दे पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता था कि भारत उसके कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोले, लेकिन भारत ने अपने किसानों के हित में ऐसा करने से इनकार कर दिया। चौहान ने कहा, “वे (अमेरिका) चाहते हैं कि हम उनके कृषि उत्पादों के लिए अपने दरवाजे खोलें। वे जीएम बीज का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर खेती करते हैं और भारी अनुदान लेते हैं। हमारे छोटे किसान उनके साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते।”
उन्होंने आगे कहा, “अमेरिका ने सोचा था कि हम डर जाएंगे, लेकिन यह आज का आत्मनिर्भर और आत्मविश्वास से भरा भारत है। राष्ट्रहित और किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”
भारत की यह रणनीति स्पष्ट करती है कि देश अब केवल तत्काल प्रतिक्रिया के बजाय दीर्घकालिक रणनीतिक सोच के आधार पर निर्णय लेता है। चाहे वह अंतरराष्ट्रीय टैरिफ वॉर हो या वैश्विक दबाव, भारत अब आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि मानता है।

