नई दिल्ली, 31 अगस्त (अशोक “अश्क”) अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के फैसले से भारत के निर्यात क्षेत्र और लाखों नौकरियों पर संकट गहराने लगा है। यह टैरिफ सीधे तौर पर भारतीय निर्यातकों और कामगारों को प्रभावित करेगा, जिससे भुगतान में देरी, ऑर्डर रद्द और उत्पादन में गिरावट जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

हालांकि, मोदी सरकार ने ट्रंप के इस टैरिफ बम से निपटने के लिए वैकल्पिक योजनाएं तैयार करनी शुरू कर दी हैं। कोविड लॉकडाउन के दौरान लागू की गई राहत योजनाओं की तर्ज पर सरकार फिर से कोविड-स्टाइल राहत पैकेज लाने की तैयारी में है, जिससे लघु और मध्यम उद्योगों को नकदी संकट से उबारा जा सके।
एक रिपोर्ट के अनुसार, दो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने बताया कि सरकार का पहला फोकस नकदी की समस्या के समाधान पर है। ट्रंप के टैरिफ से प्रभावित MSMEs के लिए सरकार बिना गारंटी लोन देने की तैयारी कर रही है। इसके तहत इमर्जेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) जैसे मॉडल को दोबारा लागू किया जा सकता है।
गौरतलब है कि कोरोना लॉकडाउन के समय इसी योजना ने हजारों उद्योगों को बचाया था, जब देशभर में 68 दिन तक औद्योगिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गई थीं।
अधिकारियों का कहना है कि भारत सरकार अब नई अंतरराष्ट्रीय मार्केट की तलाश में है ताकि अमेरिका पर निर्भरता कम की जा सके। जब तक नई बाजार विकसित नहीं होती, तब तक निर्यातकों को ऑपरेशन जारी रखने के लिए राहत पैकेज देना जरूरी होगा।
सरकार चरणबद्ध तरीके से योजनाएं लागू करना चाहती है ताकि लंबी अवधि की रणनीति भी तैयार की जा सके। इसमें मौजूदा व्यापार समझौतों को मजबूत करना, नई साझेदारियों की तलाश और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भूमिका को बढ़ाना शामिल है।
सूत्रों के मुताबिक सरकार टैक्स से जुड़ी रियायतें देने की योजना पर भी विचार कर रही है। इसमें जीएसटी रिफॉर्म को प्रमुख रूप से शामिल किया गया है। अगले सप्ताह होने वाली जीएसटी काउंसिल बैठक में टैक्स दरों को घटाने से जुड़े कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं।
अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि टैरिफ जैसे बाहरी फैक्टर भारत की अर्थव्यवस्था को ज्यादा प्रभावित नहीं कर पाएंगे, क्योंकि घरेलू उपभोग के कारण भारत की अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है।
भारत की 4.12 ट्रिलियन डॉलर GDP में निर्यात का योगदान सिर्फ 10 फीसदी (438 अरब डॉलर) है। वहीं जून तिमाही में भी भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.8 फीसदी दर्ज की गई है, जो वैश्विक मंदी के बावजूद एक मजबूत संकेत है।
मोदी सरकार की यह रणनीति न केवल निर्यात को स्थिर रखने में मदद कर सकती है, बल्कि रोजगार और उद्योगों को भी संकट से बाहर निकाल सकती है।

