
पटना, 06 जनवरी (पटना डेस्क) बिहार में कड़ाके की ठंड के बीच सियासी पारा चरम पर है। मकर संक्रांति के बाद राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव की आहट तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस—तीनों 14 जनवरी का इंतजार कर रही हैं। मकर संक्रांति के बाद संगठन में व्यापक फेरबदल की तैयारी है। 2029 के आम चुनाव को ध्यान में रखते हुए तीनों दल जमीनी स्तर पर मजबूती के लिए जिला से लेकर ब्लॉक स्तर तक समितियों के पुनर्गठन और नए चेहरों को जिम्मेदारी देने पर जोर दे रहे हैं।

विधानसभा चुनाव के बाद बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी भाजपा ने दिलीप कुमार जायसवाल की जगह संजय सरावगी को संगठन की कमान सौंपी है। सरावगी संगठन को धार देने के लिए प्रमुख पदों पर “उपयुक्त व्यक्तियों” की नियुक्ति के पक्षधर बताए जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मकर संक्रांति के बाद संगठन विस्तार और फेरबदल की औपचारिक घोषणा हो सकती है।दूसरी ओर, 2025 के विधानसभा चुनाव में करारी हार से उबरने की कोशिश कर रही राजद के सामने सबसे कठिन चुनौती है। ग्रामीण पकड़ के बावजूद अंदरूनी कलह और मुद्दों की गलत प्राथमिकताओं ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया। सूत्र बताते हैं कि विपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव जिला से पंचायत स्तर तक नेताओं के प्रदर्शन की समीक्षा कर रहे हैं।

खराब प्रदर्शन करने वालों पर गाज गिर सकती है। विदेश यात्रा से लौटे तेजस्वी अब सीनियर नेताओं से मिले फीडबैक पर काम कर रहे हैं।कांग्रेस में भी मंथन तेज है। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम को पुराने संगठनात्मक ढांचे के कारण चुनाव में तालमेल की समस्या झेलनी पड़ी। BPCC प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने तालमेल की कमी स्वीकार की है। सूत्रों का दावा है कि खरमास के बाद कांग्रेस में बड़े बदलाव और नए प्रभारी की तैनाती संभव है।

