समस्तीपुर, 10 सितम्बर (अशोक “अश्क”) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में शिक्षकों की बहाली और वित्तीय अनियमितता को लेकर मलिकौर निवासी देवनन्दन राय ने राष्ट्रपति को एक विस्तृत आवेदन भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति में उम्र सीमा और नियमों की अनदेखी की गई। उदाहरण के तौर पर, डॉ. कुमार राज्यवर्द्धन को 48 वर्ष की आयु में नियुक्त किया गया, जबकि अधिकतम आयु 35 वर्ष निर्धारित थी।
राय ने निदेशक अनुसंधान पद पर डॉ. ए.के. सिंह की नियुक्ति को भी अवैध बताया है। उन्होंने कहा कि बिना अनापत्ति प्रमाण-पत्र के उन्हें चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया, जो विश्वविद्यालय अधिनियम के खिलाफ है।
इसके अलावा विश्वविद्यालय के आम और लीची के बगानों की नीलामी में भी भारी वित्तीय अनियमितता की बात सामने आई है। दिल्ली की एक कम्पनी को 3.60 करोड़ रुपये में बगान लीज पर देने के बाद उसने सिर्फ 7 लाख रुपये जमा कर फल तोड़ लिया। कम्पनी का चेक भी बाउंस हो गया, इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने उसे किस्तों में भुगतान की छूट दे दी।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि धान की बीज परीक्षण से प्राप्त राशि का वैज्ञानिकों और पदाधिकारियों द्वारा अनुचित ढंग से वितरण किया गया, जो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के नियमों के विरुद्ध है।
देवनन्दन राय ने इन सभी मामलों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

