
पटना, 14 जनवरी ( पटना डेस्क) आज बुधवार को आदिवासी समाज के पांच दिवसीय महान सोहराय पर्व का समापन परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ किया गया।

अंतिम दिन आदिवासी पुरुष तीर-धनुष लेकर शिकार के लिए निकले और शिकार से लौटने के बाद गांव की पूरब दिशा में नाचते-गाते पहुंचे, जहां नायकी बाबा द्वारा तीर चलाने की रस्म अदा की गई। दोपहर बाद तुसकुटी गांव में सभी ग्रामीण तीर-धनुष से लैस होकर एक भेंडा गाड़कर निशाना साधने की परंपरा निभाते नजर आए। जो व्यक्ति लक्ष्य को भेदता है, उसे सम्मानपूर्वक नाचते-गाते कंधे पर बैठाकर बुढ़ा-बुढ़ी थान तक ले जाया गया।

मान्यता है कि इस दिन आदिवासी समाज शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है और बुराई के अंत का प्रतीकात्मक संदेश देता है। समाज के रविंद्र हेम्ब्रम ने बताया कि सोहराय पर्व धान कटनी के समापन के बाद खुशी, समृद्धि और एकता का प्रतीक है।

