बेगूसराय (अशोक “अश्क”) बिहार की राजनीति में एक बार फिर लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव सुर्खियों में हैं। शनिवार को बेगूसराय के गारा पंचायत में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में तेजप्रताप ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव की शैली में जनता को संबोधित किया और खुद को “जमीनी नेता” बताते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, “बहुत लोग एसी गाड़ी में चलते हैं, लेकिन हम गांव की पगडंडी पकड़ना चाहते हैं। हमें जमीनी नेता बनना है।”

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और राजद के कद्दावर नेता तेजप्रताप यादव ने राहुल गांधी और अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव की वोटर अधिकार यात्रा पर अप्रत्यक्ष रूप से तंज कसते हुए कहा कि वे लोग एसी कंटेनर में यात्रा कर रहे हैं, जबकि वे खुद आम जनता के बीच रहकर राजनीति करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “तेजस्वी जी और राहुल जी अपनी यात्रा निकाल रहे हैं, वह ठीक है। लेकिन मैं उस रास्ते पर नहीं चलना चाहता। हम गांव की गलियों और खेतों की पगडंडी से जनता के बीच पहुंचेंगे। जनता से सीधा संवाद हमारा असली मकसद है।”
तेजप्रताप यादव ने यह भी खुलासा किया कि जब महुआ में मेडिकल कॉलेज की बात आई थी तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा, “मैंने कैबिनेट छोड़ने की धमकी दे दी थी, लेकिन मेडिकल कॉलेज लेकर रहूंगा। जब कैबिनेट की बैठक में सीएम से भिड़ गया तो तेजस्वी मुझे रोक रहे थे। बोले, बवाल हो जाएगा। मैंने साफ कह दिया कि तुम्हें अभी राजनीति सीखनी है।”
इसके साथ ही तेजप्रताप ने कहा कि तेजस्वी उनके छोटे भाई हैं और हमेशा रहेंगे, लेकिन “मेरे साथ धोखा हुआ है। ऐसे ही लोग मुझे दूसरा लालू यादव नहीं कहते हैं।”
तेजप्रताप के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जेडीयू प्रवक्ता नवल शर्मा ने तेजप्रताप का समर्थन करते हुए कहा कि “तेजप्रताप ही लालू यादव के स्वाभाविक उत्तराधिकारी हैं। तेजस्वी यादव दारा शिकोह की भूमिका में हैं। उन्हें जनता से कोई लेना-देना नहीं है।”
भाजपा ने इस मुद्दे पर तंज कसते हुए इसे यादव परिवार की आंतरिक सत्ता संघर्ष बताया। भाजपा प्रवक्ता प्रभाकर सिंह ने कहा, “लालू यादव के दोनों बेटों में वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। यह लड़ाई कब, कहां और कैसे नया गुल खिलाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा।”
तेजप्रताप यादव के इस बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर वे खुद को जनता के करीब बताने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके बयानों से पार्टी के भीतर मतभेद और नेतृत्व संघर्ष की झलक भी मिल रही है।

