नई दिल्ली, 7 सितम्बर (अशोक “अश्क”) सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सशस्त्र बलों के थियेटराइजेशन यानी एकीकृत कमान प्रणाली की खुलकर वकालत करते हुए कहा है कि अगर युद्ध के दौरान सभी एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय चाहिए, तो थियेटराइजेशन को अपनाना ही होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ थल सेना की नहीं, बल्कि पूरे देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।

मानेकशॉ सेंटर में एक पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान मीडिया से बातचीत में जनरल द्विवेदी ने कहा कि अब हमें बस यह देखना है कि यह प्रक्रिया कितने समय में और किस तरह बेहतर तरीके से लागू की जा सकती है। उनके इस बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में थियेटराइजेशन को लेकर वायुसेना और नौसेना प्रमुखों की अलग राय सामने आई थी, इस मुद्दे पर एकराय नहीं बन पा रही थी।
जनरल द्विवेदी ने विस्तार से बताया कि युद्ध सिर्फ थल सेना नहीं लड़ती, बल्कि सीमा सुरक्षा बल (BSF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), डिफेंस साइबर और स्पेस एजेंसियां, इसरो, रेलवे, एनसीसी, सिविल डिफेंस और राज्य व केंद्रीय प्रशासन सभी इसका हिस्सा होते हैं। ऐसे में समन्वय और एकीकृत कमान बेहद जरूरी हो जाती है।
उल्लेखनीय है कि अगस्त में महू के आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय ‘रण संवाद’ सेमिनार में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने थियेटराइजेशन को लेकर अपनी चिंताएं जताई थी। हालांकि, सेना प्रमुख ने कहा था कि इस प्रक्रिया में किसी तरह का दबाव नहीं होना चाहिए। वहीं, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने आश्वासन दिया था कि तीनों सेनाओं के बीच मतभेदों को देशहित में सुलझाया जाएगा।
जनरल द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए बताया कि इसमें 72 हजार एनसीसी कैडेट्स ने स्वेच्छा से सिविल डिफेंस में भाग लिया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन ने दुनिया को दिखा दिया है कि जब नागरिक देश की रक्षा में जुटते हैं तो नतीजे कितने प्रभावशाली होते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम नागरिकों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी।
जीएसटी दर में कटौती को लेकर सेना प्रमुख ने केंद्र सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि इससे डिफेंस कॉरिडोर को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए यह राहतभरी खबर है। साथ ही, अनुसंधान एवं विकास, प्रशिक्षण और आधुनिकीकरण—इन तीनों क्षेत्रों में भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।,

