नई दिल्ली, 28 सितम्बर (अशोक “अश्क”) दक्षिण कोरिया ने अमेरिका की उस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें वाशिंगटन ने टैरिफ में कटौती के बदले 350 अरब डॉलर का नकद निवेश मांगा था। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत अब जटिल और गतिरोध की स्थिति में पहुंच चुकी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सियोल के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार वाई सुंग-लाक ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि दक्षिण कोरिया इतनी बड़ी नकद राशि का भुगतान करने की स्थिति में नहीं है।

वाई सुंग-लाक ने चैनल ए न्यूज से बातचीत में कहा, “यह कोई बातचीत की रणनीति नहीं है, बल्कि एक ऐसी व्यावहारिक स्थिति है जिसे हम संभाल नहीं सकते।” उन्होंने यह भी कहा कि सियोल निवेश को नकद देने की बजाय लोन, गारंटी और इक्विटी जैसे वित्तीय साधनों के जरिये पूरा करना चाहता है, लेकिन अमेरिका कैश निवेश पर ही अड़ा हुआ है। इस कारण दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ता ठहराव की स्थिति में आ गई है।
मामला तब और गरमा गया जब यह सामने आया कि अमेरिका की मांग दक्षिण कोरिया के पिछले पांच वर्षों की कुल वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) से भी अधिक है। चोसुन डेली की रिपोर्ट के मुताबिक, इतनी भारी नकद राशि का इंतजाम दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक दबाव डाल सकता है। कई आर्थिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह का निवेश विदेशी मुद्रा भंडार और वित्तीय स्थिरता पर खतरा बन सकता है।
योनहाप न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्यांग ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की यात्रा से पहले रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में कहा था कि यदि यह मांग बिना किसी सुरक्षा उपाय के मानी गई, तो देश को 1997 जैसे वित्तीय संकट का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, दक्षिण कोरिया का कहना है कि वह अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध है। सियोल अब एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) सम्मेलन की तैयारी में जुटा है, जहां इस मुद्दे पर आगे की बातचीत की उम्मीद की जा रही है।
इस घटनाक्रम से साफ है कि अमेरिका की अत्यधिक नकद निवेश की शर्त न केवल दक्षिण कोरिया के लिए आर्थिक चुनौती बन गई है, बल्कि दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग की परीक्षा भी ले रही है।

