
पूर्णिया, 21 दिसंबर (राजेश कुमार झा) दालकोला चेकपोस्ट पर चल रहे सरकारी राजस्व के बंदरबांट मामले में बिफोरप्रिंट डिजिटल की खबर ने जिला से लेकर विभाग तक हलचल मचा दी है.पूरा चेकपोस्ट अलर्ट मूड में आ गया है.कहीं भी कोई भी गाड़ियां बिना प्रॉपर चेकिंग के वगैर नहीं निकल रही है.पिछले तीन दिनों में सरकारी राजस्व के खजाने में भी अच्छी कमाई हुई है.लेकिन सबसे बड़ा सवाल कि दालकोला चेकपोस्ट पर 24 घंटे जब ADTO स्तर के पदाधिकारी पदस्थापित है.उसके वाबजूद भी इतने बड़े स्तर पर सरकारी राजस्व का बंदरबांट क्यों.

इसकी जवाबदेही किसके पास है.बताते चलें कि दालकोला चेकपोस्ट को समेकित चौकी भी कहा जाता है.बिहार के सबसे बड़े चेकपोस्ट में इनकी गिनती होती है.जिसको लेकर यहां पर ADTO लेवल के एक अधिकारी का पदस्थापना होता है.जिसकी देखरेख में दालकोला चेकपोस्ट का पूरा परिवहन आता है.फिलहाल गौतम कुमार नाम के एक ADTO का पदस्थापना हुआ है.जिनके नीचे विभाग के बड़ा बाबू हिमांशु कुमार है.जिनके ऊपर चेकपोस्ट पर परिवहन को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेवारी रहती है.जो प्रतिदिन दालकोला चेकपोस्ट की हर छोटी और बड़ी गतिविधियों की जाहरी अपने ADTO गौतम कुमार को देते है.इसके अलावे पूरे 24 घंटे में कितना का चालान/रसीद या फाइन काटा गया.इसका भी पूरा हिसाब ADTO गौतम कुमार को देते है.अब सवाल उठता है कि इतना पारदर्शी रहने के बावजूद आखिर कैसे इतने बड़े लेवल पर सरकारी राजस्व का दुरूपयोग हो रहा है और इसकी जानकारी ADTO गौतम कुमार को क्यों नहीं है. सवालों और संदेह के घेरे में ADTO गौतम कुमार.

