र्नई दिल्ली, 17 नवम्बर (अशोक “अश्क”) दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने दिल्ली में सभी निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक लगाने के सुझाव को ठुकरा दिया। CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि ऐसे कड़े कदम लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित कर सकते हैं और लंबी अवधि के स्थायी समाधानों पर ध्यान देना जरूरी है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदूषण की स्थिति के अनुसार CAQM उचित कदम उठाने के लिए सक्षम है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत विशेषज्ञों का स्थान नहीं ले सकती और हर साल प्रदूषण प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं उठा सकती। अदालत ने रुख दोहराया कि पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन बनाना अनिवार्य है, क्योंकि निर्माण और उससे जुड़े क्षेत्रों में लाखों परिवारों की आजीविका निर्भर करती है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों के साथ बैठक कर दीर्घकालिक समाधानों पर सुझाव तैयार करे, ताकि प्रदूषण संकट का स्थायी समाधान किया जा सके। केंद्र सरकार को इस संबंध में एक दिन का समय दिया गया है।
साथ ही अदालत ने बुधवार को होने वाली अगली सुनवाई में हलफनामा मांगा है, जिसमें बताया जाए कि दिल्ली में प्रदूषण पर निगरानी के लिए प्रयुक्त उपकरण पर्याप्त रूप से सक्षम हैं या नहीं।

