नई दिल्ली, 13 नवम्बर (अशोक “अश्क”) राजधानी दिल्ली की हवा लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंचती जा रही है। प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि अब स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि सिर्फ मास्क पहनना पर्याप्त नहीं है।
गुरुवार की सुनवाई के दौरान जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा ने वरिष्ठ वकीलों से पूछा कि जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा मौजूद है, तो वे अदालत में शारीरिक रूप से क्यों पेश हो रहे हैं। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, “प्रदूषण बहुत गंभीर है। यह स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। आप वर्चुअल सुनवाई का उपयोग करें।” अदालत ने यह भी संकेत दिया कि मुख्य न्यायाधीश से चर्चा कर इस विषय में सभी सुनवाई वर्चुअल माध्यम से कराने पर विचार किया जाएगा।

गुरुवार सुबह दिल्ली में घना स्मॉग फैल गया। एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार तीसरे दिन ‘Severe’ श्रेणी में दर्ज किया गया। CPCB के आंकड़ों के अनुसार बवाना 460, चांदनी चौक 455, ITO 438, रोहिणी 447, आनंद विहार 431, द्वारका सेक्टर-8 400, मुण्डका 438 और उत्तर कैंपस (DU) 414 पर दर्ज किया गया। यह स्तर स्वस्थ लोगों के लिए भी हानिकारक है और अस्थमा या हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए बेहद खतरनाक।
पराली जलाना प्रदूषण का मुख्य कारण बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकारों से जवाब मांगा है कि पराली नियंत्रण के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने कहा कि अब अदालत को ठोस नीतिगत कार्रवाई के सबूत चाहिए।
दिल्ली में सांस लेना मुश्किल हो गया है। स्कूल बंद करने, निर्माण कार्यों पर रोक लगाने और ऑड-ईवन स्कीम जैसी नीतियों पर विचार किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि यदि तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राजधानीवासियों की सेहत पर स्थायी असर पड़ सकता है। अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

