दिल्ली, 31 अक्टूबर (अशोक “अश्क्क) 2020 दिल्ली दंगों के मामलों में आरोपी गुलफिशा फातिमा की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने जिरह करते हुए कहा कि गुलफिशा 5 साल 5 महीने से जेल में हैं और अब उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि चार्जशीट 16 सितंबर 2020 को दाखिल की गई थी और उसके बाद सरकारी पक्ष हर साल एक पूरक चार्जशीट दाखिल करता रहा। सिंघवी ने अदालत से कहा कि अनिश्चितकालीन जांच नहीं हो सकती और देरी पर निर्णय लिया जाना चाहिए।

सिंघवी ने कहा कि गुलफिशा हिरासत में रहने वाली अकेली महिला हैं, जबकि 2020 से अब तक छह चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केस में चार्ज भी अभी तक फ्रेम नहीं हुए हैं, जबकि 148 सुरक्षा गवाह और 900 अन्य गवाह मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि गुलफिशा पर हिंसा में शामिल होने के कोई ठोस सबूत नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम, उमर खालिद, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा, शिफा उर रहमान और मुहम्मद सलीम खान की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई तीन नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी।
उमर खालिद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि दंगे के समय वह दिल्ली में नहीं थे और उनके खिलाफ कोई हथियार या भौतिक साक्ष्य नहीं मिले। उन्होंने बताया कि किसी भी गवाह का बयान उन्हें हिंसा से नहीं जोड़ता।
शरजील इमाम के वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि शरजील पांच साल नौ महीने से जेल में हैं और अभियोजन पक्ष को जांच पूरी करने में तीन साल लगे। उन्होंने बताया कि केस की जांच 2024 में पूरी हो चुकी थी, बावजूद इसके शरजील न्यायिक हिरासत में हैं।
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार की सुनवाई में वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी, कपिल सिब्बल और सिद्धार्थ दवे ने आरोपियों के पक्ष में दलीलें पेश कीं। कोर्ट ने सभी मामलों में निर्णय तीन नवंबर तक के लिए टाल दिया।

