नई दिल्ली, 18 नवम्बर (अशोक “अश्क”) फ्रांस से 114 राफेल विमान खरीदने की योजना पर चर्चा के बीच अब रक्षा विशेषज्ञ भारत के स्वदेशी 4.5 पीढ़ी के फाइटर जेट तेजस मार्क-2 की वकालत कर रहे हैं। तेजस मार्क-2 को पब्लिक सेक्टर की कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित किया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार प्रोटोटाइप का करीब 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और 2026 में इसकी पहली उड़ान होगी। भारतीय वायु सेना इसका परीक्षण 2026 के अंत से शुरू करेगी और 2029-30 से फुल स्केल प्रोडक्शन की संभावना है।

वायु सेना वर्तमान में फाइटर जेट्स की भारी कमी से जूझ रही है। चीन और पाकिस्तान की दो-फ्रंट चुनौतियों के कारण उसे कम से कम 42 स्क्वाड्रन की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 30 एक्टिव स्क्वाड्रन हैं। ऐसे में 114 राफेल खरीदने की डिमांड तो है, लेकिन इसकी कीमत लगभग 2–2.5 लाख करोड़ रुपये है, जो अगले 10 वर्षों के रक्षा बजट का भारी हिस्सा ले लेगी।
दूसरी ओर, तेजस मार्क-2 की लागत 700 करोड़ रुपये प्रति जेट है। इसमें जीई 414 इंजन, ब्रह्मोस और अस्त्र-2 मिसाइलों सहित एडवांस राडार और एआई कंट्रोल सिस्टम हैं। कॉम्बैट रेडियस 1,500 किमी और 13 हथियार प्वाइंट्स के साथ यह फाइटर जेट लंबे समय तक वायु सेना की जरूरतों को पूरा कर सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि राफेल पर खर्च होने वाली राशि में लगभग 250 तेजस मार्क-2 खरीदे जा सकते हैं, जिससे लंबी अवधि की क्षमता बढ़ेगी।
एचएएल ने नासिक में प्रोडक्शन लाइन स्थापित कर हर साल 24 फाइटर जेट डिलीवर करने की क्षमता हासिल कर ली है। 2029-30 तक यह संख्या 30 तक पहुंच जाएगी। मुख्य चुनौती अमेरिकी कंपनी जीई से इंजन की डिलीवरी में हो रही देरी है। तेजस मार्क-1A में भी इसी कारण डिलीवरी में विलंब हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी तेजस मार्क-2 न केवल बजट में सस्ता है, बल्कि लंबी अवधि में भारतीय वायु सेना की ताकत बढ़ाने के लिए ‘देसी राफेल’ विकल्प के रूप में प्रभावी साबित होगा।

