नई दिल्ली (अशोक “अश्क”) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ के इस्तीफ़े को लेकर चल रही राजनीतिक अटकलों और अफ़वाहों पर विराम लगाने की कोशिश की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से स्वेच्छा से पद छोड़ा है, और उनके इस्तीफ़े को लेकर किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव या नज़रबंदी की बात बेबुनियाद और निराधार है।

पत्रकारों से एक साक्षात्कार में शाह ने कहा, “धनखड़ साहब ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से अपनी स्वास्थ्यगत परेशानियों का उल्लेख किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री और सरकार के सभी मंत्रियों को धन्यवाद दिया है। इस्तीफ़ा पूरी तरह स्वैच्छिक है और इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक साजिश की कल्पना करना अनुचित है।”
हालाँकि, अमित शाह के इस बयान के बावजूद विपक्ष खासकर कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना जारी रखा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आज गृह मंत्री ने धनखड़ जी को लेकर कुछ कहा, लेकिन इससे रहस्य और भी गहरा गया है। कोई नहीं जानता कि किसानों के समर्थक रहे ऊर्जावान और बेबाक जगदीप धनखड़ पिछले एक महीने से कहां हैं, और क्यों पूरी तरह गुमनाम हैं?”
ध्यान देने योग्य है कि जगदीप धनखड़ पिछले कुछ समय से सार्वजनिक जीवन से अनुपस्थित रहे हैं, और उनके अचानक इस्तीफ़े ने कई सवालों को जन्म दिया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक हलकों में यहां तक दावा किया गया कि धनखड़ को नजरबंद कर दिया गया था, या वे सरकार की कार्यप्रणाली से असहमत थे।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित शाह ने कहा, “बात का बतंगड़ नहीं बनाना चाहिए। धनखड़ जी ने संविधान के अनुसार कार्य किया है और स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ा है। इस पर अनावश्यक राजनीतिक रंग न चढ़ाया जाए।”
शाह ने यह भी कहा कि संविधान के 130वें संशोधन और आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव पर सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे ग़लत अफवाहें फैलाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस न पहुँचाएं।
गृह मंत्री के इस स्पष्टीकरण के बावजूद, जगदीप धनखड़ की लंबी सार्वजनिक चुप्पी और आकस्मिक इस्तीफ़ा अभी भी राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखने की रणनीति में जुटा हुआ है, जबकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस विषय पर और कोई रहस्य नहीं है।

