पटना (अशोक “अश्क”) बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग में पदस्थापित सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर विनोद कुमार राय की काली कमाई का सच आखिरकार सामने आ गया है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की छापेमारी में विनोद राय के पटना और सीतामढ़ी स्थित ठिकानों से बेहिसाब दौलत और कीमती सामान बरामद हुए हैं। इस कार्रवाई ने सरकारी पदों पर बैठे भ्रष्ट अधिकारियों के चेहरे से नकाब हटा दिया है।

EOU ने जब इंजीनियर विनोद राय के ठिकानों पर छापा मारा, तो जांच टीम भी अंदर की भव्यता देखकर दंग रह गई। पटना के भूतनाथ इलाके में स्थित विनोद राय का आलीशान मकान किसी महल से कम नहीं है। चार मंजिला यह मकान अपनी भव्य बनावट और डिजाइन के कारण इलाके में सबसे अलग और आकर्षक नजर आता है। मकान के हर फ्लोर पर गोलाकार बालकनी, सजावटी पौधे, लाइट ग्रीन पेंट और लाल-सफेद बॉर्डर के कॉम्बिनेशन ने इसके लुक को बेहद आलीशान बना दिया है। घर के अंदर भी एसी युक्त कमरे, वुडन वर्क और महंगे इंटीरियर ने इसकी भव्यता को और निखारा है।

ईओयू की टीम को छापेमारी के दौरान करीब 35 लाख रुपये नकद, करीब 20 लाख रुपये के आधे जले नोट और लाखों की कीमत के जले हुए नोट मिले हैं। इसके साथ ही 12 से ज्यादा बैंक खातों में मोटी रकम जमा, करोड़ों रुपये मूल्य के जमीन प्लॉट, सोने के बिस्किट, और लाखों के हीरे जवाहरात व आभूषण भी बरामद किए गए हैं। टीम ने विनोद राय के पास से बेहिसाब दस्तावेज और संपत्ति के कागजात भी जब्त किए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इंजीनियर विनोद राय के पास 100 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्तिnहोने का अनुमान है, जिसका आकलन फिलहाल अधिकारी कर रहे हैं। पटना और सीतामढ़ी में मौजूद इसके ठिकानों की तलाशी के दौरान कई ऐसे दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी मिले हैं, जिनसे अन्य संपत्तियों और लेन-देन की जानकारी मिल सकती है।
EOU की इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भी किस तरह भ्रष्टाचार ने जड़ें जमा रखी हैं। ग्रामीण इलाकों के विकास के लिए आवंटित धन का इस प्रकार दुरुपयोग किया जाना न केवल अपराध है, बल्कि यह राज्य के विकास में सबसे बड़ी बाधा भी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विनोद राय का रहन-सहन हमेशा ही शाही था, लेकिन उसकी संपत्ति की वास्तविकता इतनी चौंकाने वाली होगी, इसका किसी को अंदाजा नहीं था। खासकर भूतनाथ इलाके में स्थित उसका चार मंजिला मकान, जो बाहर से ही किसी होटल या रिसॉर्ट जैसा नजर आता है, आज पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन चुका है।
EOU अधिकारियों ने बताया कि सभी जब्त संपत्तियों और नकदी की जांच कर ली गई है और अब बेनामी संपत्ति कानून और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही इस बात की भी जांच की जा रही है कि विनोद राय के इस घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अभी शुरुआती स्तर पर है और आने वाले दिनों में इससे जुड़ी कई और कड़ियां उजागर हो सकती हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ इस बड़ी कार्रवाई को राज्य सरकार की “जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन” नीति का हिस्सा माना जा रहा है। जनता को अब उम्मीद है कि ऐसे ही अन्य भ्रष्ट अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा जाएगा, ताकि जनता का पैसा सही हाथों में और सही उद्देश्य के लिए खर्च हो सके।

