नई दिल्ली, 27 सितंबर (अशोक “अश्क”) पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के आतंकवाद से जुड़े बयान पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में कड़ा पलटवार किया। भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पाकिस्तान को बेनकाब करते हुए आतंकवाद के मुद्दे पर करारी प्रतिक्रिया दी और शरीफ के बयान को झूठ और दोगलेपन का पुलिंदा करार दिया।
गहलोत ने कहा, “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने फिर आतंकवाद का महिमामंडन किया है, जो उनकी विदेश नीति का अहम हिस्सा बन चुका है।” उन्होंने 25 अप्रैल 2025 की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ‘रेसिस्टेंस फ्रंट’ जैसे आतंकी संगठन को जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों की हत्या के आरोपों से बचाने की कोशिश की थी।

गहलोत ने पाकिस्तान की आतंकियों को शरण देने की नीति पर निशाना साधते हुए कहा, “यह वही देश है जिसने वर्षों तक ओसामा बिन लादेन को छुपाया और आतंकी कैंप चलाने की बात उसके मंत्री खुद स्वीकार चुके हैं।” उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में भारतीय बलों द्वारा पाकिस्तान के कई एयरबेस को नष्ट किए जाने की तस्वीरें सामने आई हैं। यदि पाकिस्तान इन्हें ‘जीत’ मानता है, तो यह उसकी विडंबना है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि “भारत हमेशा अपने निर्दोष नागरिकों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।” साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच सभी लंबित मुद्दों का समाधान केवल द्विपक्षीय स्तर पर ही होगा किसी तीसरे पक्ष की इसमें कोई भूमिका नहीं है।
पेटल गहलोत भारत की संयुक्त राष्ट्र में प्रथम सचिव हैं। उन्हें जुलाई 2023 में भारत के स्थायी मिशन में यह पदभार सौंपा गया था। इससे पहले वे विदेश मंत्रालय की यूरोपियन वेस्ट डिवीजन में अंडर सेक्रेटरी रह चुकी हैं और भारतीय मिशन, पेरिस और सैन फ्रांसिस्को में भी कार्य कर चुकी हैं।
गहलोत न सिर्फ एक कुशल राजनयिक हैं, बल्कि एक संगीतप्रेमी भी हैं। सोशल मीडिया पर वे अक्सर गिटार बजाते हुए वीडियो साझा करती हैं। उनका ‘बेला चाओ’ और ‘Lost On You’ जैसे गीतों का प्रदर्शन खासा लोकप्रिय हुआ है।
उन्होंने सेंट जेवियर कॉलेज, मुंबई से आर्ट्स में स्नातक, लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति विज्ञान में परास्नातक और मोंटेरे के मिडलबरी इंस्टीट्यूट से भाषा अनुवाद में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की है।
UNGA में उनका जवाब न केवल पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा करता है, बल्कि भारत की सख्त और स्पष्ट विदेश नीति का भी परिचायक है।

