नई दिल्ली, 5 अक्तूबर (अशोक “अश्क) रूस द्वारा पाकिस्तान को JF-17 थंडर ब्लॉक III फाइटर जेट के लिए RD-93MA इंजन सप्लाई करने के दावों ने भारतीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस कथित डील को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है, जिससे भारत की विदेश नीति और रूस के साथ रिश्तों पर नई बहस छिड़ गई है।

कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इसे “कूटनीतिक विफलता” करार दिया। उन्होंने कहा, “रूस, जो भारत का सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार रहा है, अब पाकिस्तान को वही इंजन दे रहा है जिसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुआ था। यह सरकार की विदेश नीति की असफलता है।”
जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार एक तरफ रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम और Su-57 स्टेल्थ फाइटर खरीदने की बातचीत कर रही है, वहीं रूस पाकिस्तान को भी सैन्य तकनीक से सशक्त कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यह कैसी रणनीतिक साझेदारी है, जहां हमारा ‘मित्र’ हमारे विरोधी की सैन्य ताकत बढ़ा रहा है?
इस पर पलटवार करते हुए बीजेपी प्रवक्ता अमित मालवीय ने कांग्रेस पर “देशविरोधी प्रोपेगेंडा” फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “रूस ने पाकिस्तान को इंजन सप्लाई करने के दावों को स्पष्ट रूप से नकार दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता ने एक ऐसी वेबसाइट की खबर को आधार बनाया है जो प्रो-पाकिस्तान एजेंडे के लिए बदनाम है। न कोई आधिकारिक पुष्टि है, न ही कोई विश्वसनीय स्रोत।”
मालवीय ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह बार-बार “सूचना युद्ध” का हिस्सा बन रही है और ऐसे मुद्दों पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की झूठी खबरें फैलाना सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है, जबकि इससे देश की सामरिक और कूटनीतिक स्थिति कमजोर हो सकती है।
हालांकि रूस की ओर से अब तक इस डील को लेकर कोई औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है। न ही भारत सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है। लेकिन यह विवाद भारत की विदेश नीति, रूस के साथ रिश्तों और पाकिस्तान को लेकर कूटनीतिक संतुलन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह डील सच होती है, तो भारत को रूस से अपने संबंधों की पुनः समीक्षा करनी पड़ सकती है। वहीं विपक्ष इसे मोदी सरकार की “छवि आधारित” कूटनीति का पतन बता रहा है। फिलहाल देशभर में इस मसले पर बहस तेज हो गई है।

