मथुरा (अशोक “अश्क”) वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज, जो अपनी सादगी, भक्ति और प्रभावशाली प्रवचनों के चलते सोशल मीडिया पर खासे चर्चित रहते हैं, अब एक नई वजह से सुर्खियों में आ गए हैं। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने उन्हें लेकर बड़ा बयान दिया है और खुलेआम चुनौती पेश की है। रामभद्राचार्य ने एक साक्षात्कार में प्रेमानंद महाराज की विद्वत्ता पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा, “अगर प्रेमानंद जी में चमत्कार है तो मैं चैलेंज करता हूं, वे मेरे सामने एक अक्षर संस्कृत बोलकर दिखाएं या मेरे कहे हुए श्लोकों का अर्थ समझा दें।”

गौरतलब है कि प्रेमानंद महाराज के प्रवचन सुनने और उनका आशीर्वाद लेने देश-विदेश से लोग आते हैं। यहां तक कि क्रिकेटर विराट कोहली जैसी जानी-मानी हस्तियां भी उनसे मिलने पहुंच चुकी हैं। बावजूद इसके, रामभद्राचार्य ने उनके ज्ञान और आध्यात्मिक गहराई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
रामभद्राचार्य ने कहा कि पहले के समय में केवल विद्वान ही धर्म और शास्त्रों की व्याख्या किया करते थे, लेकिन आजकल कई ऐसे लोग कथावाचन कर रहे हैं, जिन्हें शास्त्रों की गहराई का ज्ञान नहीं है। उन्होंने प्रेमानंद महाराज को “बालक” की संज्ञा देते हुए कहा कि उनके मन में प्रेमानंद के प्रति कोई व्यक्तिगत द्वेष नहीं है, लेकिन वह उन्हें न तो विद्वान मानते हैं और न ही चमत्कारी पुरुष।
उन्होंने आगे कहा, “चमत्कार वही कहलाता है जो शास्त्रीय चर्चा में सहज हो और श्लोकों का अर्थ सही ढंग से समझा सके। केवल भजन गा लेना या लोकप्रिय हो जाना किसी को चमत्कारी नहीं बना देता।” रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता को “क्षणभंगुर” बताते हुए कहा कि यह अल्पकालिक है और ऐसा आकर्षण लंबे समय तक नहीं टिकता।
प्रेमानंद महाराज का जीवन हालांकि कई लोगों के लिए प्रेरणा रहा है। उनकी दोनों किडनियां पिछले 19 वर्षों से खराब हैं, फिर भी वे हर दिन वृंदावन की परिक्रमा करते हैं और नियमित रूप से प्रवचन देते हैं। उनके अनुयायी उन्हें भक्ति और त्याग का प्रतीक मानते हैं।
रामभद्राचार्य के इस बयान के बाद धार्मिक जगत में बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे ईर्ष्या और विद्वता की प्रतिस्पर्धा मान रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग इसे आध्यात्मिक क्षेत्र में गुणवत्ता बनाम लोकप्रियता की बहस के रूप में देख रहे हैं।
यह देखना दिलचस्प होगा कि संत प्रेमानंद महाराज इस चुनौती और टिप्पणी पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, या वह अपने मौन और भक्ति के मार्ग पर ही अग्रसर रहेंगे। धार्मिक जगत में यह टकराव फिलहाल चर्चा का विषय बना हुआ है।

