पटना, 8 सितम्बर (अशोक “अश्क”) उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक चौंका देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला का प्रेम विवाह महज 24 घंटे भी नहीं टिक सका। रामजानकी मंदिर में शनिवार को प्रेमी के साथ शादी करने वाली महिला तब अपने पहले पति के पास लौट गई जब उसके चार मासूम बच्चे रोते-बिलखते उससे लिपट गए। यह भावुक घटनाक्रम पूरे कस्बे में चर्चा का विषय बन गया।

सरीला कस्बे के रहने वाले 27 वर्षीय हरि सिलवासा (गुजरात) में मजदूरी करता है। वहीं उसकी मुलाकात एक महिला से हुई थी, जो पहले से विवाहित थी और पांच बच्चों की मां थी। हरि उसे अपने साथ लेकर सरीला आ गया और शनिवार को दोनों ने रामजानकी मंदिर में विधिवत शादी कर ली। इस शादी में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और उन्हें नवदंपती को आशीर्वाद देते देखा गया।
लेकिन रविवार सुबह इस प्रेम कहानी ने नाटकीय मोड़ ले लिया। महिला का पहला पति शिवशंकर, जो मिर्जापुर जिले के छानबे ब्लॉक स्थित पड़री गांव का निवासी है, अपने चार बच्चों को लेकर मंदिर पहुंच गया। बच्चों ने जैसे ही मां को देखा, फफक-फफककर रोने लगे और उससे लिपट गए। यह भावुक दृश्य देख महिला का दिल पसीज गया और उसने अपने पहले पति के साथ वापस जाने का फैसला कर लिया।
मामला थाने तक पहुंचा तो दोनों पक्षों को पुलिस चौकी पर बुलाया गया। चौकी प्रभारी ने बताया कि दोनों पक्षों की सहमति से मामला सुलझा लिया गया है। किसी ने कोई कानूनी शिकायत दर्ज नहीं कराई। महिला अब अपने पहले पति शिवशंकर और बच्चों के साथ वापस लौटने को तैयार हो गई है।
शिवशंकर ने पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी के साथ शादी करीब 20 साल पहले हुई थी और उनके पांच बच्चे हैं। पूरा परिवार सिलवासा में रहकर काम करता था। एक सितंबर की रात जब वह ड्यूटी से लौटा तो बच्चे रोते हुए मिले और बताया कि मां घर छोड़कर चली गई है।
परेशान शिवशंकर ने तब से पत्नी की तलाश शुरू कर दी थी। शनिवार को उसे जानकारी मिली कि उसकी पत्नी सरीला में है और उसने किसी से शादी कर ली है। इसके बाद वह चार बच्चों को लेकर वहां पहुंचा, जबकि सबसे बड़ी बेटी को गांव में ही छोड़ आया था।
हरि, जिसे महिला के विवाहित होने और बच्चों की जानकारी थी, पुलिस चौकी में समझौते के बाद चुपचाप वहां से चला गया।
यह पूरा मामला रिश्तों, भावनाओं और सामाजिक सच्चाई का एक ऐसा आईना बनकर उभरा है, जिसमें कानून से ज्यादा इंसानियत और पारिवारिक जुड़ाव ने भूमिका निभाई।4 घंटे में टूटा रिश्ता, 4 बच्चों के आंसुओं ने मां को लौटने पर किया मजबूर
पटना, 8 सितम्बर (अशोक “अश्क”) उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक चौंका देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला का प्रेम विवाह महज 24 घंटे भी नहीं टिक सका। रामजानकी मंदिर में शनिवार को प्रेमी के साथ शादी करने वाली महिला तब अपने पहले पति के पास लौट गई जब उसके चार मासूम बच्चे रोते-बिलखते उससे लिपट गए। यह भावुक घटनाक्रम पूरे कस्बे में चर्चा का विषय बन गया।
सरीला कस्बे के रहने वाले 27 वर्षीय हरि सिलवासा (गुजरात) में मजदूरी करता है। वहीं उसकी मुलाकात एक महिला से हुई थी, जो पहले से विवाहित थी और पांच बच्चों की मां थी। हरि उसे अपने साथ लेकर सरीला आ गया और शनिवार को दोनों ने रामजानकी मंदिर में विधिवत शादी कर ली। इस शादी में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और उन्हें नवदंपती को आशीर्वाद देते देखा गया।
लेकिन रविवार सुबह इस प्रेम कहानी ने नाटकीय मोड़ ले लिया। महिला का पहला पति शिवशंकर, जो मिर्जापुर जिले के छानबे ब्लॉक स्थित पड़री गांव का निवासी है, अपने चार बच्चों को लेकर मंदिर पहुंच गया। बच्चों ने जैसे ही मां को देखा, फफक-फफककर रोने लगे और उससे लिपट गए। यह भावुक दृश्य देख महिला का दिल पसीज गया और उसने अपने पहले पति के साथ वापस जाने का फैसला कर लिया।
मामला थाने तक पहुंचा तो दोनों पक्षों को पुलिस चौकी पर बुलाया गया। चौकी प्रभारी ने बताया कि दोनों पक्षों की सहमति से मामला सुलझा लिया गया है। किसी ने कोई कानूनी शिकायत दर्ज नहीं कराई। महिला अब अपने पहले पति शिवशंकर और बच्चों के साथ वापस लौटने को तैयार हो गई है।
शिवशंकर ने पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी के साथ शादी करीब 20 साल पहले हुई थी और उनके पांच बच्चे हैं। पूरा परिवार सिलवासा में रहकर काम करता था। एक सितंबर की रात जब वह ड्यूटी से लौटा तो बच्चे रोते हुए मिले और बताया कि मां घर छोड़कर चली गई है।
परेशान शिवशंकर ने तब से पत्नी की तलाश शुरू कर दी थी। शनिवार को उसे जानकारी मिली कि उसकी पत्नी सरीला में है और उसने किसी से शादी कर ली है। इसके बाद वह चार बच्चों को लेकर वहां पहुंचा, जबकि सबसे बड़ी बेटी को गांव में ही छोड़ आया था।
हरि, जिसे महिला के विवाहित होने और बच्चों की जानकारी थी, पुलिस चौकी में समझौते के बाद चुपचाप वहां से चला गया।
यह पूरा मामला रिश्तों, भावनाओं और सामाजिक सच्चाई का एक ऐसा आईना बनकर उभरा है, जिसमें कानून से ज्यादा इंसानियत और पारिवारिक जुड़ाव ने भूमिका निभाई।

