
बक्सर, 27 दिसम्बर (विक्रांत) भारत में पाई जाने वाली सफेद पैरों वाली बनबकरी मृग, जिसे वैज्ञानिक भाषा में बोसेलाफस ट्रैगोकैमेलस कहा जाता है, पर अब तक कम शोध हुआ है। लेकिन वीर कुंवर सिंह कृषि महाविद्यालय, डुमरांव के वैज्ञानिकों की टीम ने इस मृग के व्यवहार को लेकर महत्वपूर्ण अध्ययन कर नई जानकारी सामने रखी है।

यह शोध हरियाणा कृषि फार्म में पाले गए बनबकरी मृगों पर किया जा रहा है।अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने मृग की आंखों के नीचे स्थित प्रीऑर्बिटल ग्रंथि द्वारा गंध चिह्नन की प्रक्रिया को बारीकी से समझा। यह पाया गया कि सामान्य अवस्था में नर और मादा मृग इन ग्रंथियों को शायद ही खोलते हैं, लेकिन तनाव, भूख, नियंत्रण की स्थिति और परिपक्वता के दौरान इन ग्रंथियों का खुलना स्पष्ट रूप से देखा गया।

इन ग्रंथियों से निकलने वाले गंध रसायन संचार और व्यवहार संकेतों में अहम भूमिका निभाते हैं।यह बनबकरी मृग में प्रीऑर्बिटल ग्रंथि के खुलने की पहली वैज्ञानिक रिपोर्ट मानी जा रही है। परियोजना का नेतृत्व डॉ. सुदय प्रसाद कर रहे हैं और यह अनुसंधान राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई), बिहार सरकार द्वारा वित्त पोषित है।

