नई दिल्ली, 17 नवम्बर (अशोक “अश्क”) बांग्लादेश की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक और बेहद नाटकीय साबित हुआ, जब अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT-BD) ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों में दोषी करार देते हुए मौत की सज़ा सुनाई। तीन सदस्यीय पीठ जिसका नेतृत्व जस्टिस गुलाम मुर्तजा कर रहे थे, ने करीब 400 पन्नों के विस्तृत फैसले को छह भागों में बांटकर सुनाया।

इसी मामले में पूर्व गृह मंत्री और पूर्व पुलिस महानिदेशक (IG) को भी मृत्युदंड दिया गया है। ट्रिब्यूनल ने अपने निर्णय में कहा कि अभियुक्तों ने सत्ता में रहते हुए व्यापक मानवाधिकार उल्लंघन, अवैध हिरासत और राज्य-संरक्षित हिंसा जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम दिया। यह फैसला बांग्लादेश की न्याय प्रणाली के इतिहास में अब तक के सबसे कठोर और निर्णायक फैसलों में गिना जा रहा है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
सज़ा सुनाए जाने के कुछ घंटों बाद ही बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए शेख हसीना के आवास पर बुलडोज़र भेज दिया। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई “कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा” है, लेकिन विपक्ष और समर्थकों ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है।
इस कार्रवाई के बाद ढाका और आसपास के इलाकों में तनाव बढ़ गया है और कई स्थानों पर छिटपुट हिंसा की खबरें सामने आई हैं। सुरक्षा बलों को तैनात कर हालात नियंत्रित करने की कोशिशें की जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने शांति बनाए रखने और न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की अपील की है।

