पटना, 21 अक्तूबर (पटना डेस्क) गया जिले के बाराचट्टी आरक्षित विधानसभा क्षेत्र की राजनीति एक बार फिर विरासत की सियासत का केंद्र बन गई है। महागठबंधन ने पहले दिवंगत पूर्व सांसद व पूर्व विधायक भगवती देवी की पुत्री समता देवी को प्रत्याशी बनाकर उत्साह बढ़ाया, लेकिन अंतिम क्षणों में अचानक फैसला बदल दिया गया। सोमवार को नामांकन के समय राजद ने समता देवी की जगह उनकी बेटी तन्नुश्री कुमारी को पार्टी सिंबल थमा दिया।
इस अप्रत्याशित फैसले से इलाके में हलचल मच गई। रविवार को जहां समता देवी को टिकट मिलने की खबर से कार्यकर्ता जश्न मना रहे थे, पोस्टर-बैनर छपने लगे थे, वहीं सोमवार दोपहर को राजद मुख्यालय से जारी नए सिंबल ने सबको चौंका दिया। इसके बाद तन्नुश्री कुमारी ने शेरघाटी अनुमंडल कार्यालय पहुंचकर नामांकन कर दिया, जबकि समता देवी खाली हाथ रह गईं।

इस बदलाव को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा गर्म है। कुछ इसे रणनीतिक फैसला मान रहे हैं, तो कुछ अंदरूनी दबाव का परिणाम बता रहे हैं। कई जानकार इसे भगवती देवी की विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
उधर, एनडीए से हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सेक्युलर ने ज्योति देवी को फिर से मैदान में उतारा है। वे जीतन राम मांझी की समधन और मंत्री संतोष सुमन की सास हैं। दो बार की विजेता ज्योति देवी अपनी पकड़ और जनसंपर्क के बल पर फिर जीत की उम्मीद कर रही हैं।
तीसरी ओर, जन सुराज पार्टी ने हेमंत पासवान को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। वे खुद को “विरासत से अलग नया विकल्प” बता रहे हैं।
अब सवाल है, क्या बाराचट्टी एक बार फिर विरासत को चुनेगा, या नया चेहरा बदलेगा सियासत की दिशा?

