बक्सर, 30 नवम्बर (विक्रान्त) बिहार कृषि विश्वविद्यालय (सबौर) में रबी 2025-26 की 30वीं अनुसंधान परिषद् बैठक (RCM) का समापन आज मुख्य सभागार में कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह के दिशानिर्देश में संपन्न हुआ। समापन सत्र में गोविन्द वल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर के डॉ. राम भजन सिंह, आईसीएआर-आईएआरआई नई दिल्ली के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. वाई.एस. शिवाय, और राज्य के तीन प्रगतिशील महिला कृषक श्रीमती सीमा सिन्हा (कटिहार), श्रीमती रिंकू देवी (बाँका), श्रीमती अन्नू कुमारी (पटना) शामिल रहे।बैठक के दौरान विभागवार प्रस्तुतियाँ जारी रहीं, जिनमें मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, सीड साइंस, प्लांट पैथोलॉजी, एंटोमोलॉजी, कृषि अभियांत्रिकी, कृषि अर्थशास्त्र और प्रसार शिक्षा विभाग ने अपनी अनुसंधान प्रगति रिपोर्ट पेश की।

नई किस्मों और तकनीकों में सबौर राई–1, सबौर गेहूँ 5, सिंदूर पौधे के रोपण और प्राकृतिक उत्पादन, बिक्सिन एवं मैंगिफेरिन निष्कर्षण, मखाना यौगिक निष्कर्षण, केले में राइजोम वीविल प्रबंधन और चना में ड्राई रूट रॉट प्रबंधन जैसी तकनीकें शामिल थीं।समापन सत्र में तीन महिला कृषकों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि BAU के प्रशिक्षण ने उनकी आजीविका में सुधार किया और कृषि आधारित कार्यों में आत्मनिर्भर बनाया। डॉ. शिवाय ने विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और युवा वैज्ञानिकों को धैर्यपूर्वक अनुसंधान जारी रखने की सलाह दी। डॉ. राम भजन सिंह ने BAU की क्षमता और नई तकनीकों के प्रभावशील अनुसंधान की सराहना की।अंत में निदेशक अनुसंधान डॉ. अनिल कुमार सिंह ने सभी अतिथियों और वैज्ञानिकों को धन्यवाद दिया और विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को आगे बढ़ाने के लिए उत्साहवर्धन किया। विभिन्न फसलों और तकनीकों के डेवलपर्स को प्रशंसा पत्र प्रदान किए गए, जिसमें मवेशी चारा ब्लॉक, मल्च प्रबंधन और हाइड्रोपोनिक मक्का फॉडर शामिल थे।

