पटना, 1 सितम्बर (अशोक “अश्क”) बिहार की राजधानी पटना से सटे बख्तियारपुर दियारा इलाके में बाढ़ राहत की सहायता राशि कई मृतकों के बैंक खातों में भेजे जाने का मामला सामने आया है। प्रखंड की हरदासपुर दियारा, कालादियारा, रूपस महाजी, चिरैया रूपस और रामनगर सतभैया पंचायत के बाढ़ प्रभावितों के खाते में सात-सात हजार रुपये की मदद पहुंची है, जिसमें कई लाभार्थी पहले ही मृत्यु शैय्या पर हैं। आश्चर्य की बात यह है कि मृतकों के बैंक खाते अब भी सक्रिय हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस गंभीर मामले की जानकारी अधिकारियों को दे दी है। हरदासपुर दियारा के मुखिया मनोज कुमार ने बताया कि उनके पंचायत की बाढ़ प्रभावितों की सूची में लगभग सौ ऐसे लोग शामिल हैं जो पंचायत के निवासी नहीं हैं, जबकि आठ से दस लोगों का निधन भी हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहत राशि के लिए बनायी गई सूची बनाने में न तो अनुश्रवण समिति की राय ली गई और न ही पंचायत मुखिया से पारिवारिक जानकारी मांगी गई।
मुखिया मनोज कुमार ने यह भी बताया कि मृतकों की सूची जनप्रतिनिधियों द्वारा सीओ को दी गई थी, लेकिन जिला मुख्यालय के कर्मियों की लापरवाही के कारण मृतकों के खातों में राहत राशि भेजी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि रूपस महाजी के कई वार्डों में पति-पत्नी दोनों के खातों में भी बाढ़ सहायता राशि जमा हुई है।
यह मामला तब उजागर हुआ जब मृतकों के बैंक खातों में बाढ़ राहत राशि पहुंचने लगी। हरदासपुर दियारा के निवासी राम बालक राय, दीना राय, कैलाश राय, राम किशुन राय और अलखदेव राय का निधन 2024 से पहले हो चुका है, फिर भी उनके खाते में राहत राशि भेजी गई। इसी प्रकार अन्य चार पंचायतों के सैकड़ों मृतकों के खातों में भी बाढ़ राहत की रकम आई है।
मुखिया मनोज कुमार ने पुनः कहा कि राहत राशि के लिए बनाए गए सूची में कई मृतकों और गैर निवासियों के खाते शामिल हैं, और इस संबंध में अधिकारियों को शिकायत कर दी गई है। बख्तियारपुर के सीओ निरंजन कुमार ने कहा कि मुखिया से इस संबंध में शिकायत मिली है। कुछ परिवारों के पति-पत्नी दोनों के खातों में भी राशि जमा हुई है। इस मामले की जांच कराई जाएगी और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई करते हुए राशि वापस कराने के कदम उठाए जाएंगे।
यह मामला बाढ़ राहत वितरण व्यवस्था में बड़ी लापरवाही को उजागर करता है, जिससे संबंधित अधिकारियों और प्रशासन की जवाबदेही तय होगी।

