पटना, 15 नवम्बर (पटना डेस्क) बिहार में एनडीए कार्यकर्ता ऐतिहासिक जीत का जश्न मना रहे हैं। इस बार एनडीए गठबंधन को 203 सीटों पर विजय मिली है, जिसे अब तक का सबसे बड़ा बहुमत माना जा रहा है। हालांकि, सभी सीटों पर जीत का अंतर बड़ा नहीं रहा। राज्य की 11 विधानसभा सीटों पर मतदान परिणाम बेहद रोमांचक रहे, जहां बीजेपी और जेडीयू उम्मीदवारों को आख़िरी दौर तक संघर्ष करना पड़ा। कुछ सीटों पर जीत का अंतर मात्र 27 वोटों तक सिमट गया, जिससे साफ है कि महागठबंधन ने इन क्षेत्रों में कड़ी चुनौती पेश की।

चुनाव परिणामों में पहली बार भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। बीजेपी ने 89 सीटें अपने नाम कीं, जबकि 2020 में वह दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी। बाद में कई विपक्षी विधायक भाजपा में शामिल हुए थे, जिससे उसकी संख्या बढ़ी थी। इस बार जेडीयू 85 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। वहीं, 2020 में सबसे बड़ी पार्टी रही आरजेडी इस चुनाव में केवल 25 सीटों पर सिमट गई और तीसरे स्थान पर पहुंच गई।
इन नतीजों के बीच आरजेडी में उथल-पुथल बढ़ गई है। संजय यादव पर तेजप्रताप यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें पार्टी तोड़ने का जिम्मेदार बताया और कई बार ‘जयचंद’ शब्द का इस्तेमाल किया। सवाल यह उठ रहा है कि अब संजय यादव और राज्यसभा सांसद मनोज झा की भूमिका क्या होगी। फिलहाल राजद के पांच राज्यसभा सांसद हैं—जिनमें प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त होगा, फैयाज अहमद जुलाई 2028 में, जबकि संजय यादव और मनोज झा अप्रैल 2030 तक राज्यसभा सदस्य बने रहेंगे।

