पूर्णिया (राजेश कुमार झा) बिहार विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही प्रदेश की राजनीति में दल-बदल का सिलसिला तेज होता जा रहा है। नेताओं का अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए दलों की अदला-बदली का खेल शुरू हो गया है। इसी क्रम में भाजपा को एक बड़ा झटका देते हुए बनमनखी विधानसभा सीट से पूर्व विधायक देवनारायण रजक ने राष्ट्रीय जनता दल का दामन थाम लिया है।

देवनारायण रजक ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ पटना स्थित राजद के प्रदेश कार्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। उन्हें सदस्यता पार्टी के प्रदेश प्रधान महासचिव रणविजय साहू ने दिलाई। इस दौरान पार्टी प्रवक्ता एजाज अहमद ने सभी नए सदस्यों को राजद का प्रतीक चिह्न वाला गमछा और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की जीवनी गोपालगंज टू रायसीना भेंट कर उनका स्वागत किया।
राजद में शामिल होने के तुरंत बाद देवनारायण रजक अपने समर्थकों के साथ नेता प्रतिपक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से उनके आवास पर मिले। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात औपचारिकताभर नहीं है, बल्कि चुनावी रणनीति के लिहाज से इसका महत्व है।
देवनारायण रजक वर्ष 2000 में भाजपा के टिकट पर बनमनखी विधानसभा से विधायक चुने गए थे। हालांकि 2005 में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया था। इसके बाद से ही वे भाजपा में हाशिए पर चले गए थे। लंबे समय तक पार्टी में उपेक्षा झेलने के बाद वे सक्रिय राजनीति में फिर से पहचान की तलाश में थे। माना जा रहा है कि भाजपा द्वारा टिकट बंटवारे में लगातार नजरअंदाजी किए जाने से वे नाराज थे और इसी कारण उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया।
राजद में उनकी एंट्री को पार्टी के लिए चुनावी लिहाज से एक मजबूत कदम माना जा रहा है। देवनारायण रजक का सामाजिक आधार मजबूत है और बनमनखी के अलावा आसपास के क्षेत्रों में भी उनकी पकड़ अच्छी मानी जाती है। सूत्रों की मानें तो राजद उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में बड़ी भूमिका देने की तैयारी में है।
पूर्व विधायक की राजद में एंट्री से बनमनखी विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। इस सीट पर अब नए राजनीतिक समीकरण बनते दिख रहे हैं। राजद की रणनीति साफ है कि वह सामाजिक समीकरणों और पुराने जनाधार वाले नेताओं के सहारे भाजपा और अन्य दलों को कड़ी टक्कर देना चाहती है।
बिहार चुनावों से पहले जिस तरह से नेताओं का दल-बदल हो रहा है, उससे साफ है कि आने वाले दिन और भी राजनीतिक उथल-पुथल से भरे होंगे। ऐसे में देवनारायण रजक का राजद में आना केवल एक नेता का पार्टी बदलना नहीं, बल्कि एक पूरे विधानसभा क्षेत्र की सियासत को प्रभावित करने वाला कदम माना जा रहा है।

