पटना, 15 सितंबर (सेंट्रल डेस्क) बिहार की राजनीति एक बार फिर से करवट लेने को तैयार है। 2025 के विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और सभी प्रमुख दल अभी से रणनीति बनाने में जुट गए हैं। वर्ष 2020 के चुनाव में राजद 75 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, लेकिन सत्ता की गणित में भाजपा और जदयू ने मिलकर सरकार बनाई। अब तस्वीर बदल चुकी है भाजपा 80 विधायकों के साथ वर्तमान विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी है। ऐसे में आने वाले चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन दल सबसे बड़ी पार्टी का खिताब अपने नाम करता है।

बिहार की राजनीति में गठबंधन का बोलबाला है, और किसी भी बड़ी पार्टी को 243 में से सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिलता। ऐसे में “स्ट्राइक रेट” यानी कुल लड़ी गई सीटों में जीतने का अनुपात ही पार्टी की सफलता की असली कसौटी होगा। जिस पार्टी का स्ट्राइक रेट ऊंचा रहेगा, वही विधानसभा में बड़े दल के रूप में उभर सकती है।
2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एनडीए के तहत 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से 11 सीटें उसने वीआईपी को अपने कोटे से दी थीं। भाजपा ने तब 74 सीटों पर जीत दर्ज की थी, यानी उसका स्ट्राइक रेट 67% रहा। वीआईपी के चार विधायक बने, लेकिन चुनाव के बाद तीन भाजपा में शामिल हो गए और एक विधायक की मृत्यु हो गई। बाद में उस सीट पर उपचुनाव में राजद की जीत हुई।
वर्तमान में भाजपा के पास 80 विधायक हैं और वह सबसे बड़ी पार्टी है। लेकिन इस दर्जे को बनाए रखना आसान नहीं होगा। 2010 के चुनाव में भाजपा ने 91 सीटें जीती थीं, फिर भी जदयू 115 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। इससे स्पष्ट है कि सिर्फ ज्यादा सीटें जीतना काफी नहीं, बल्कि गठबंधन में प्रमुख भूमिका निभाने के लिए रणनीतिक संतुलन और बेहतर स्ट्राइक रेट भी जरूरी है।
2025 के चुनाव में एनडीए में पहले से अधिक दल शामिल हैं। भाजपा, जदयू, हम, वीआईपी के साथ अब एक और दल गठबंधन में जुड़ चुका है। ऐसे में सीट बंटवारे को लेकर पेच फंसना तय है। शुरुआती संकेतों के अनुसार भाजपा और जदयू दोनों लगभग 100-100 सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं। अब अगर भाजपा को 100 सीटें मिलती हैं, तो उसे कम से कम 70-75 सीटों पर जीत दर्ज करनी होगी ताकि उसका स्ट्राइक रेट 2020 के स्तर पर बना रहे या उससे बेहतर हो।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 भाजपा के लिए सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि प्रभाव और पकड़ की परीक्षा भी होगी। सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा बनाए रखने के लिए भाजपा को न सिर्फ सीट बंटवारे में समझदारी दिखानी होगी, बल्कि जितनी सीटों पर चुनाव लड़े, उनमें जीत की दर यानी स्ट्राइक रेट भी उच्च रखना होगा। विपक्ष में खड़ी राजद और अन्य दलों के बीच यह मुकाबला बेहद रोचक और नजदीकी रहने की संभावना है।

