पटना, 02 दिसम्बर (पटना डेस्क) बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों से हाल के छह महीनों में 100 से अधिक लड़कियों और महिलाओं के गायब होने का मामला राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। मानवाधिकार मामलों के वकील एसके झा ने आयोगों में दो याचिकाएं दायर करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।वकील झा ने बताया कि मोतिहारी से सटे भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय तस्कर सक्रिय हैं।

ये गैंग लड़कियों को नेपाल, चीन, ब्राजील और सऊदी अरब तक करोड़ों रुपए में बेच रहे हैं। अधिकांश पीड़ित 18 से 25 साल की युवा लड़कियां हैं, जो गरीब या आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं।मामले की गंभीरता को बताते हुए झा ने कहा कि इस घटना से पुलिस की कार्यशैली और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठता है। रक्सौल, आदापुर, रामगढ़वा और हरपुर थाना क्षेत्रों में दर्ज कई गायब होने के मामलों में कुछ लड़कियों का रेस्क्यू तो हो गया है, जैसे आदापुर के चैनपुर की एक ही परिवार की चार लड़कियां। लेकिन अधिकांश अभी भी लापता हैं।मानव तस्करी विरोधी एनजीओ और सीमावर्ती सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, गैंग लड़कियों को सोशल मीडिया के जरिए लालच देकर फंसाता है। उन्हें नौकरी, शादी या बेहतर भविष्य का झांसा दिया जाता है। इसके बाद लड़कियों को अकेले या बॉर्डर पार करवा कर विदेशी एजेंटों को सौंप दिया जाता है। कुछ लड़कियों से शादी कर ली जाती है, जबकि अन्य को रेड लाइट एरिया में जबरन बेच दिया जाता है। नशे और शारीरिक-मानसिक शोषण के मामले भी सामने आए हैं।नेपाल के गरीब और रिमोट एरिया की लड़कियां सबसे अधिक शिकार बन रही हैं। कई परिवार आर्थिक मजबूरी में बेटियों को मजदूरी या नौकरी का बहाना देकर तस्करों को सौंप देते हैं। इसके अलावा, हत्या कर अंगों की खरीद-फरोख्त के मामले भी सामने आए हैं।एनजीओ “स्वच्छ रक्सौल” और “प्रयास” की रिपोर्ट के अनुसार, गायब लड़कियों का रेस्क्यू सिर्फ पांच प्रतिशत ही हो पा रहा है। एसएसबी सहित स्थानीय प्रशासन लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सीमा पर तस्करी गैंग बेहद सक्रिय और संगठित हैं। मानवाधिकार आयोग से मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है, ताकि पीड़ित लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

