पटना, 28 नवम्बर (पटना डेस्क) राज्य में नई सरकार के गठन के बाद शुरू हुआ अतिक्रमण हटाओ अभियान राजनीतिक गलियारों में गर्म बहस का विषय बन गया है। पटना, नालंदा, सीतामढ़ी, आरा और मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों में झुग्गी-झोपड़ियों और कच्चे मकान–दुकानों पर बुलडोजर चलने के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया मंच X पर सरकार और गृहमंत्री सम्राट चौधरी को कड़ी चेतावनी दी है।

तेज प्रताप ने लिखा कि नवंबर से शुरू होने वाली ठंड छोटे-छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए बेहद कठिन होती है। ऐसे मौसम में घर टूटने का दर्द असहनीय है, लेकिन सरकार को इसकी कोई परवाह नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या गृहमंत्री को नहीं दिख रहा कि लोग खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं?
तेज प्रताप ने इस कार्रवाई को गरीबों, दलितों और वंचितों पर सीधा हमला बताया। उनका कहना है कि हजारों परिवार बेघर होकर सड़क पर भटक रहे हैं, परंतु सरकार उनकी पीड़ा देखने को तैयार नहीं। उन्होंने लिखा कि राज्य में सामाजिक न्याय केवल नारेबाजी बनकर रह गया है।
गृहमंत्री सम्राट चौधरी को निशाने पर लेते हुए तेज प्रताप ने कहा कि पदभार संभालते ही वे जनता को भूल बैठे हैं, जबकि कल तक उन्हीं लोगों का आभार जताते नहीं थकते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जिलों में दो दिनों से लगातार गरीबों के आशियाने उजाड़े जा रहे हैं।
अंत में उन्होंने सरकार से दो मांगें रखीं—पहली, अतिक्रमण के नाम पर गरीबों के घर तोड़ने पर तत्काल रोक लगे; दूसरी, जिनके मकान टूटे हैं उन्हें आवास और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि गरीबों की बद्दुआ से कोई नहीं बचेगा और समय आने पर जनता इसका हिसाब लेगी।

