
पटना, 23 जनवरी (पटना डेस्क) बिहार की राजनीति में गुरुवार की शाम उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब नीतीश सरकार ने राज्य स्तरीय सुरक्षा समीक्षा समिति की बैठक के बाद कई बड़े नेताओं की सुरक्षा में बड़ा फेरबदल कर दिया। खुफिया इनपुट और समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर लिए गए इस फैसले में जहां सत्ताधारी दल और बीजेपी के कई शीर्ष नेताओं की सुरक्षा बढ़ाकर Z श्रेणी में कर दी गई, वहीं विपक्ष के प्रमुख चेहरों की सुरक्षा घटाई या पूरी तरह वापस ले ली गई।

सरकार के फैसले के तहत कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा, वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और आरजेडी नेता व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी की सुरक्षा पूरी तरह वापस ले ली गई है। वहीं नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की सुरक्षा Z श्रेणी से घटाकर Y+ कर दी गई है। Y+ सुरक्षा में कुल 11 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं, जिनमें एक या दो कमांडो और दो पीएसओ शामिल होते हैं।सुरक्षा में इस कटौती को लेकर सियासी गलियारों में सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष इसे राजनीतिक भेदभाव से जोड़कर देख रहा है और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है। वहीं सरकार का दावा है कि यह फैसला पूरी तरह पेशेवर आकलन और खतरे की समीक्षा के आधार पर लिया गया है। दूसरी ओर बीजेपी और सत्ता पक्ष के नेताओं की सुरक्षा में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे को Z श्रेणी की सुरक्षा दी गई है।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की सुरक्षा Y से बढ़ाकर Y+ कर दी गई है।Z श्रेणी की सुरक्षा में 22 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं, जिनमें चार से पांच एनएसजी कमांडो के अलावा दिल्ली पुलिस, आईटीबीपी, सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस के जवान शामिल होते हैं। कुल मिलाकर बिहार में बदली सुरक्षा व्यवस्था ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

