नई दिल्ली, 16 नवम्बर (अशोक “अश्क”) गैर सरकारी संगठन असोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की नवीनतम रिपोर्ट ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नवनिर्वाचित विधायकों की पृष्ठभूमि को लेकर कई अहम जानकारियां सामने रखी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस बार बिहार में जीत दर्ज करने वाले 243 में से 90 फीसदी विधायक करोड़पति हैं। वहीं 53 फीसदी विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, हालांकि यह आंकड़ा पिछली विधानसभा की तुलना में कम है। वर्ष 2020 में जहां 68 फीसदी विधायकों पर आपराधिक मामले थे, वहीं इस बार यह संख्या घटकर 53 फीसदी रह गई है।

ADR की विस्तृत जांच के अनुसार, 243 में से 130 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से 102 पर गंभीर आरोप लगे हैं। इन मामलों में हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण, महिला हिंसा, बलात्कार, भ्रष्टाचार और चुनाव से जुड़े अपराध शामिल हैं। रिपोर्ट बताती है कि 19 विजेताओं पर हत्या की कोशिश, 6 पर हत्या, जबकि 9 विधायकों पर महिलाओं के विरुद्ध हिंसा से जुड़े मामले दर्ज हैं।
गरीबी के पैमाने पर देश में सबसे नीचे माने जाने वाले बिहार में नेताओं की संपत्ति एक अलग तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट बताती है कि इस बार के 243 विधायकों में से 90 प्रतिशत करोड़पति हैं, जो 2020 के 81 फीसदी के मुकाबले अधिक है। इनमें 55 विधायक 10 करोड़ रुपये से अधिक, 44 विधायक 5 से 10 करोड़, जबकि 119 विधायक 1 से 5 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं। सभी विधायकों की कुल घोषित संपत्ति करीब 2,192.93 करोड़ रुपये है और प्रति विधायक औसत संपत्ति लगभग 9 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह 2020 के औसत 4.32 करोड़ रुपये की तुलना में दोगुने से भी अधिक है।
दलवार-wise देखें तो करोड़पति विधायकों की संख्या सभी प्रमुख दलों में बड़ी है। जेडीयू के 85 में से 78, बीजेपी के 89 में से 77, आरजेडी के सभी 24, एलजेपी (राम विलास पासवान) के 19 में से 16, कांग्रेस के सभी 6 और एआईएमआईएम के सभी 5 विधायक करोड़पति हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो 84 विधायक 5वीं से 12वीं पास, 147 ग्रेजुएट या उच्च शिक्षित, 5 डिप्लोमा धारक, 7 केवल साक्षर, जबकि उम्र के आंकड़ों में 59 फीसदी विधायक 41 से 60 वर्ष के बीच हैं। युवा विधायकों की संख्या मात्र 16 फीसदी यानी 38 है।
14 नवंबर को आए नतीजों में एनडीए ने 202 सीटों के साथ बड़ी जीत हासिल की, जबकि महागठबंधन केवल 35 सीटों पर सिमट गया।

